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पुरानी पद्धति के आधार पर हो बैंकों का ऑडिट : संघ
Updated Mon, 18 Jun 2018 11:07 PM IST
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश ब्रांच ऑफ एनआईआरसी ऑफ आईसीएआई ने बैंकों में ऑडिट नियमों को 2009-10 की पद्धति पर दोबारा जारी करने का केंद्र सरकार से आग्रह किया है। हमीरपुर में पत्रकार वार्ता में हिमाचल प्रदेश एनआईआरसी ऑफ आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान सचिव राजीव शर्मा ने कहा कि ऑडिट के नए नियमों के तहत बैंकों को ही ऑडिटर तय करने का अधिकार मिल गया है। 2009-10 से पहले भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों के ऑडिटर तय किए जाते थे। जिससे बैंक ऑडिट में पारदर्शिता बनी रहती थी।
उन्होंने कहा कि इस पद्धति से बैंकों में कामकाज की पारदर्शिता कम हुई है और नॉन परफॉर्मिंग अकाउंट पर चैक रखने का काम जो स्वतंत्र चार्टर अकाउंटेंट द्वारा किया जाता था, वह काफी हद तक कम हुआ है। यही कारण है कि समय के साथ नीरव मोदी जैसे कांड सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में भारतीय चार्टर अकाउंटेंट संस्थान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांग पत्र सौंपकर स्वतंत्र ऑडिटर रखने की पुरानी पद्धति को बहाल करने, 20 करोड़ राशि तक के सरकारी बैंकों को हर वर्ष ऑडिट के दायरे में लाने की मांग की गई। प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार आरबीआई से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। उन्होंने कहा कि 20 करोड़ टर्नओवर वाली प्रदेश की 90 फीसदी ब्रांचें नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार इस संदर्भ में नियम बनाए, ताकि सभी बैंक ऑडिट के दायरे में आएं। सरकार से मांग की गई कि निजी बैंकों के ऑडिटर भी स्वतंत्र रूप से नियुक्त किए जाएं। इस अवसर पर सीए महेंद्र सिंह पटियाल, सीए संदीप शर्मा, सीए अरुण गिरि, सीए अरविंद शर्मा और सीए नवनीत उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि इस पद्धति से बैंकों में कामकाज की पारदर्शिता कम हुई है और नॉन परफॉर्मिंग अकाउंट पर चैक रखने का काम जो स्वतंत्र चार्टर अकाउंटेंट द्वारा किया जाता था, वह काफी हद तक कम हुआ है। यही कारण है कि समय के साथ नीरव मोदी जैसे कांड सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में भारतीय चार्टर अकाउंटेंट संस्थान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांग पत्र सौंपकर स्वतंत्र ऑडिटर रखने की पुरानी पद्धति को बहाल करने, 20 करोड़ राशि तक के सरकारी बैंकों को हर वर्ष ऑडिट के दायरे में लाने की मांग की गई। प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार आरबीआई से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। उन्होंने कहा कि 20 करोड़ टर्नओवर वाली प्रदेश की 90 फीसदी ब्रांचें नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार इस संदर्भ में नियम बनाए, ताकि सभी बैंक ऑडिट के दायरे में आएं। सरकार से मांग की गई कि निजी बैंकों के ऑडिटर भी स्वतंत्र रूप से नियुक्त किए जाएं। इस अवसर पर सीए महेंद्र सिंह पटियाल, सीए संदीप शर्मा, सीए अरुण गिरि, सीए अरविंद शर्मा और सीए नवनीत उपस्थित रहे।
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