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शिक्षक मंच ने वित विभाग और सरकार को भेजा मांगों का पिटारा
Updated Sun, 11 Nov 2018 11:05 PM IST
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हमीरपुर। हिमाचल शिक्षक मंच ने प्रदेश सरकार के वित्त विभाग को आगामी बजट में कर्मचारियों की लंबित आर्थिक मांगों को समायोजित करके उनके लिए विशेष बजट के प्रावधान की मांग की है। मंच के संयोजक सदस्यों अश्वनी भट्ट, संजय मोगू, संजीव राणा, सुनील राजपूत, तपिश थापा, विजय शमशेर भंडारी और अमित शर्मा का कहना है कि प्रदेश के कर्मचारियों की पांच मुख्य मांगों को मंच ने सरकार व वित्त विभाग के समक्ष रखा है। प्रदेश के सभी कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा सरकार को आगामी वर्ष के बजट में करनी चाहिए। 15 मई 2003 के बाद के सरकारी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बंद करके प्रदेश में नई पेंशन योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत प्रत्येक कर्मचारी को उसके मूल वेतन और महंगाई भत्ते के दस फीसदी के बराबर की राशि का भुगतान एक निजी कंपनी को करना होता है। इसी राशि के बराबर की राशि प्रदेश सरकार भी कंपनी के खाते में हर माह जमा करती है। कर्मचारी की सेवानिवृत्ति तक कुल जमा राशि का रखरखाव और प्रबंधन निजी कंपनी की ओर से शेयर बाजार में किया जाता है।
सेवा अवधि के दौरान इस राशि को निकाल पाना काफी कठिन होता है। परंतु सेवानिवृत्ति के बाद भी दो वर्षों तक इस राशि को कर्मचारी नहीं निकाल सकता। इसके बाद कुल जमा राशि का केवल साठ प्रतिशत भाग ही कर्मचारी को मिलता है। बाकी के चालिस प्रतिशत पर कंपनी कब्जा जमा कर बैठ जाती है और इस राशि पर जो भी ब्याज बाजार जोखिमों के तहत बनता है वही कर्मचारी को पेंशन के रूप में मिलता है। मंच की दूसरी मांग है कि प्रदेश के कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य योजना लागू की जाए। मंच ने तीसरी मांग की है कि प्रदेश के चिकित्सकों को जिस प्रकार नान प्रैक्टिस अलाउंस दिया जाता है, उसी तर्ज पर प्रदेश के अध्यापकों के लिए नॉन ट्यूशन अलाउंस दिया जाए। मंच ने प्रदेश के सभी मुख्याध्यापकों को वित्तीय शक्तियां देने और हाल ही में मुख्याध्यापकों के बंद किए गए विशेष भत्ते को पुन: बहाल करने की भी मांग प्रदेश सरकार से की है। मंच की पांचवीं मांग प्रदेश के विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्यों को तुरंत प्रभाव से नियमित करते हुए उनके सभी देय वित्तीय लाभ नियुक्ति की तिथि से जारी किए जाएं।
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सेवा अवधि के दौरान इस राशि को निकाल पाना काफी कठिन होता है। परंतु सेवानिवृत्ति के बाद भी दो वर्षों तक इस राशि को कर्मचारी नहीं निकाल सकता। इसके बाद कुल जमा राशि का केवल साठ प्रतिशत भाग ही कर्मचारी को मिलता है। बाकी के चालिस प्रतिशत पर कंपनी कब्जा जमा कर बैठ जाती है और इस राशि पर जो भी ब्याज बाजार जोखिमों के तहत बनता है वही कर्मचारी को पेंशन के रूप में मिलता है। मंच की दूसरी मांग है कि प्रदेश के कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य योजना लागू की जाए। मंच ने तीसरी मांग की है कि प्रदेश के चिकित्सकों को जिस प्रकार नान प्रैक्टिस अलाउंस दिया जाता है, उसी तर्ज पर प्रदेश के अध्यापकों के लिए नॉन ट्यूशन अलाउंस दिया जाए। मंच ने प्रदेश के सभी मुख्याध्यापकों को वित्तीय शक्तियां देने और हाल ही में मुख्याध्यापकों के बंद किए गए विशेष भत्ते को पुन: बहाल करने की भी मांग प्रदेश सरकार से की है। मंच की पांचवीं मांग प्रदेश के विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्यों को तुरंत प्रभाव से नियमित करते हुए उनके सभी देय वित्तीय लाभ नियुक्ति की तिथि से जारी किए जाएं।
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