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सभ्यताएं नहीं होती कभी नष्ट : डॉ. अग्निहोत्री
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने हमीरपुर के ठाकुर जगदेव चंद स्मृति शोध संस्थान नेरी में पश्चिमी हिमालय में पुरातात्विक अवशेष विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद सेमिनार में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। जबकि प्रदेश विवि शिमला के कुलपति डॉ. सिकंदर कुमार समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। परिसंवाद के प्रथम दिन देश भर से आए 40 शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि सभ्यताएं कभी नष्ट नहीं होती, समय के साथ केवल स्थानांतरित होती हैं।
अधिकतर सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ। पानी खत्म होने पर वह सभ्यताएं अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो गई। उन्होंने कहा कि पश्चिमोत्तर हिमालय क्षेत्र इतिहास का अथाह भंडार है। वेदों में इस क्षेत्र को सप्त सिंधू के नाम से उदृत किया गया है। इतिहास कभी तटस्थ नहीं होता, जो पक्ष प्रभावी होता है इतिहास उसी का होता है। भारतीय इतिहास के स्रोत अरबी, फारसी और अंग्रेजी भाषा में मिलते हैं, जिन्होंने विकृत इतिहास लेखन किया। भारत को अपने इतिहास के विश्वसनीय स्रोत स्वयं खोजने होंगे जोकि, उस समय की भाषा संस्कृत में निहित है। डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि भारतीय इतिहास लिखने के लिए संस्कृत और अन्य प्राचीन भारतीय भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है। हिमाचल केंद्रीय विवि में पुरातत्व विभाग स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे पूर्व भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि ऐतिहासिक तथ्य केवल दस्तावेजों और साहित्य में ही नहीं मिलते। बल्कि लोक कथाएं भी इसका महत्वपूर्ण स्रोत हैं। उन्होंने परिसंवाद की सार्थकता स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में इतिहास से संबंधित शोधों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान मुहैया करवाएगा। बिलासपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक सोहन लाल ने लाखों वर्षों पुराने पुरातात्विक अवशेषों को प्रदर्शित करते हुए उनके बारे में ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी दी। प्रदेश विवि शिमला में पत्रकारिता विभाग से डॉ. अजय श्रीवास्तव ने प्रदेश में पुरातत्व संरक्षण और संवर्द्धन के क्षेत्र में गंभीर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. विवेक डांगी ने उद्घाटन सत्र के दौरान अपना बीज वक्तव्य रखा। इस मौके पर उद्यमी महेश चंद गुप्ता, नेरी शोध संस्थान के अध्यक्ष विजय मोहन कुमार पुरी, महासचिव भूमि दत्त शर्मा, समन्वयक चेत राम गर्ग, आयोजन सचिव डॉ. राकेश शर्मा, वैचारिक प्रमुख डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष सूरत ठाकुर, मार्गदर्शक वेद अग्नि, आरएसएस के प्रांत कार्यवाह किस्मत कुमार, प्रदेश भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव डा. कर्म सिंह, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सहायक निदेशक सुरेश कुमार, प्रो. देव दत्त शर्मा, प्रो. बीके शिवराम, प्रो. हरी सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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अधिकतर सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ। पानी खत्म होने पर वह सभ्यताएं अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो गई। उन्होंने कहा कि पश्चिमोत्तर हिमालय क्षेत्र इतिहास का अथाह भंडार है। वेदों में इस क्षेत्र को सप्त सिंधू के नाम से उदृत किया गया है। इतिहास कभी तटस्थ नहीं होता, जो पक्ष प्रभावी होता है इतिहास उसी का होता है। भारतीय इतिहास के स्रोत अरबी, फारसी और अंग्रेजी भाषा में मिलते हैं, जिन्होंने विकृत इतिहास लेखन किया। भारत को अपने इतिहास के विश्वसनीय स्रोत स्वयं खोजने होंगे जोकि, उस समय की भाषा संस्कृत में निहित है। डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि भारतीय इतिहास लिखने के लिए संस्कृत और अन्य प्राचीन भारतीय भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है। हिमाचल केंद्रीय विवि में पुरातत्व विभाग स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे पूर्व भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि ऐतिहासिक तथ्य केवल दस्तावेजों और साहित्य में ही नहीं मिलते। बल्कि लोक कथाएं भी इसका महत्वपूर्ण स्रोत हैं। उन्होंने परिसंवाद की सार्थकता स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में इतिहास से संबंधित शोधों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान मुहैया करवाएगा। बिलासपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक सोहन लाल ने लाखों वर्षों पुराने पुरातात्विक अवशेषों को प्रदर्शित करते हुए उनके बारे में ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी दी। प्रदेश विवि शिमला में पत्रकारिता विभाग से डॉ. अजय श्रीवास्तव ने प्रदेश में पुरातत्व संरक्षण और संवर्द्धन के क्षेत्र में गंभीर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. विवेक डांगी ने उद्घाटन सत्र के दौरान अपना बीज वक्तव्य रखा। इस मौके पर उद्यमी महेश चंद गुप्ता, नेरी शोध संस्थान के अध्यक्ष विजय मोहन कुमार पुरी, महासचिव भूमि दत्त शर्मा, समन्वयक चेत राम गर्ग, आयोजन सचिव डॉ. राकेश शर्मा, वैचारिक प्रमुख डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष सूरत ठाकुर, मार्गदर्शक वेद अग्नि, आरएसएस के प्रांत कार्यवाह किस्मत कुमार, प्रदेश भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव डा. कर्म सिंह, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सहायक निदेशक सुरेश कुमार, प्रो. देव दत्त शर्मा, प्रो. बीके शिवराम, प्रो. हरी सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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