फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Education Minister Rohit Thakur said that 45 thousand rupees will be spent on one school if it is integrated w

Himachal: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर बोले- सीबीएसई पाठ्यक्रम से जोड़ने पर एक स्कूल पर 45 हजार खर्च

Tue, 31 Mar 2026 12:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 31 Mar 2026 12:00 AM IST
सार

राज्य के 151 स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होगा।

विज्ञापन
Education Minister Rohit Thakur said that 45 thousand rupees will be spent on one school if it is integrated w
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है। राज्य के 151 स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होगा। जिलावार आंकड़ों के अनुसार कांगड़ा में सबसे अधिक 18, शिमला में 13, हमीरपुर में 11 और मंडी में 10 स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ा गया है। बिलासपुर व चंबा में 6-6, ऊना व सिरमौर में 7-7, सोलन में 9, कुल्लू में 5, किन्नौर में 4 और लाहौल-स्पीति में 2 विद्यालय शामिल हैं।

विज्ञापन

विधायक राकेश जम्वाल, रणधीर शर्मा, अनुराधा राणा और आशीष बुटेल के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह सभी विद्यालय सत्र 2026-27 से सीबीएसई के तहत संचालित होंगे। एक विद्यालय को सीबीएसई से जोड़ने में लगभग 45 हजार रुपये खर्च हुए हैं, जिसे संबंधित स्कूलों ने अपनी निधि से वहन किया है। इन विद्यालयों की हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्धता समाप्त हो चुकी है। हालांकि, वर्ष 2026-27 में कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं प्रदेश शिक्षा बोर्ड ही आयोजित करेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

वहीं, सीबीएसई पैटर्न के तहत पहली बोर्ड परीक्षाएं वर्ष 2028 में आयोजित होंगी। सीबीएसई और स्कूल शिक्षा बोर्ड दोनों ही एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं। सीबीएसई में हिंदी माध्यम सहित अंग्रेजी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई का विकल्प उपलब्ध रहेगा। सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान और वाणिज्य वर्ग के विषय हिंदी माध्यम में भी पढ़ाए जा सकेंगे। कुछ स्कूलों में कार्यरत एसएमसी शिक्षकों के भविष्य को लेकर निर्णय संबंधित स्कूल प्रबंधन समितियां लेंगी।

विज्ञापन

कृषि-बागवानी विषय को अनिवार्य बनाने का विचार नहीं
विधायक कुलदीप सिंह राठौर के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि फिलहाल कक्षा 6 से 12 तक कृषि एवं बागवानी विषय को अनिवार्य बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। कृषि विषय पहले से ही 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। वहीं, बागवानी विषय को भी इसी सत्र से 9वीं से 12वीं तक वैकल्पिक व्यावसायिक विषय के रूप में शुरू किया जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed