आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण: रोजगार दिलाने में हिमाचल प्रदेश पड़ोसी राज्यों से अव्वल, 2023-24 में बेरोजगारी दर 5.4
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2023-24 के अनुसार रोजगार दिलाने में हिमाचल प्रदेश पड़ोसी राज्यों और भारत के औसत से बेहतर रहा है।
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रोजगार दिलाने में हिमाचल प्रदेश पड़ोसी राज्यों और भारत के औसत से बेहतर रहा है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2023-24 के अनुसार समस्त आयु की श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) हिमाचल प्रदेश के लिए 60.5, उत्तराखंड के लिए 46.2, पंजाब के लिए 43.7, हरियाणा के लिए 37.4 और भारत में 45.1 प्रतिशत रही है। महिलाओं के लिए यह दर उत्तराखंड को छोड़कर इन राज्यों और पूरे भारत से आगे रही है। यह दोगुने से अधिक रही है। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से किया गया है। यह खुलासा हिमाचल प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में हुआ है। इसे सदन के पटल पर रखा गया।
इस सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2023-24 में श्रमिक जनसंख्या अनुपात समस्त आयु वर्ग में हिमाचल प्रदेश की स्थिति 57.2, उत्तराखंड की 44.2, पंजाब में 41.3. हरियाणा में 36.1 और पूरे भारत के औसत 43.7 से बेहतर है। सर्वेक्षण के नतीजों से स्पष्ट होता है कि हिमाचल प्रदेश में महिलाएं 51.8 प्रतिशत अखिल भारतीय स्तर पर और पड़ोसी राज्यों में अपने समकक्षों की तुलना में आर्थिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। श्रम बल में वे लोग शामिल होते हैं, जो या तो काम कर रहे हैं या कार्य के लिए उपलब्ध हैं। 2023-24 में प्रदेश में बेरोजगारी दर 5.4 प्रतिशत थी। सामान्य स्थिति में बेरोजगारी दर ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों के लिए 3.2 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 7.0 प्रतिशत थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में पुरुषों के लिए यह दर 4.8 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 18.2 प्रतिशत थी।
रोजगार केंद्र के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 6,75,671 है। इनमें सर्वाधिक कांगड़ा में 1,38,191 और उसके बाद मंडी में 1,35,106 बेरोजगार हैं। शिमला में 58,420, चंबा में 52,065, सिरमौर में 50,288, हमीरपुर में 49,159, ऊना में 45,538, बिलासपुर में 45,239, सोलन में 37,704, कुल्लू में 36,879, किन्नौर में 6,240 और लाहौल स्पीति में 4,177 पंजीकृत हैं। विशेष रोजगार कार्यालयों में 16,665 दिव्यांग कार्यरत हैं।