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Himachal: सीएम सुक्खू बोले- नेरी में देश के पहले बायोचार संयंत्र में 28,800 कार्बन क्रेडिट का अनुमान

Tue, 30 Jun 2026 09:24 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 30 Jun 2026 09:24 PM IST
सार

हमीरपुर जिले के नेरी में देश का पहला स्वदेशी बायोचार संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा की।

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CM sukhvinder Sukhu says: Country's first biochar plant in Neri estimated to generate 28,800 carbon credits.
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बैठक की अध्यक्षता की। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के नेरी में देश का पहला स्वदेशी बायोचार संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। यह संयंत्र राज्य को दस वर्षों में लगभग 28,800 कार्बन क्रेडिट अर्जित करने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना रोजगार के अवसर बढ़ाएगी। यह वन संसाधनों के सतत प्रबंधन को प्रोत्साहित करेगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ राज्य के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

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परियोजना के लिए बायोमास की खरीद 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है। गुणवत्ता बनाए रखने पर प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। बायोचार का उत्पादन चीड़ की पत्तियों, लैंटाना, बांस और अन्य पौध-आधारित बायोमास से होगा। पिछले वर्ष अगस्त में नेरी और जाहू में दो बायोचार संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौता हुआ था। यह समझौता डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी और वन विभाग के बीच हुआ। इसमें प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई भी शामिल थी।

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हिम एवरग्रीन कार्यक्रम का विस्तार

सुक्खू ने हिम एवरग्रीन इंटीग्रेटेड क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड एग्रो-फॉरेस्ट्री कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। इसके तहत कृषि प्रणालियों में वृक्षों को शामिल किया जाएगा। यह कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन के प्रयासों को बढ़ाएगा और किसानों के लिए आर्थिक अवसर पैदा करेगा। यह हिमाचल प्रदेश के 50,000 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में लागू होगा। इससे 1.35 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के प्रबंधन में योगदान मिलेगा।

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यह कार्यक्रम मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जैव विविधता का संरक्षण और कृषि की जलवायु अनुकूलता बढ़ाएगा। कार्बन अवशोषण के माध्यम से मापनीय जलवायु परिणाम प्राप्त होंगे। प्रोक्लाइम के सलाहकार मंडल के सदस्य एरिक सोलहाइम ने हिमाचल सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्था जलवायु संकट से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रभावी क्रियान्वयन के समन्वय के लिए प्रतिबद्ध है।

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