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Himachal CM: सीएम सुक्खू ने बिजली सब्सिडी छोड़ी, मंत्री-कांग्रेस विधायक भी छोड़ेंगे; जनता से भी की ये अपील
Thu, 02 Jan 2025 10:38 AM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Thu, 02 Jan 2025 10:38 AM IST
सार
Electricity Subsidy: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नए साल के पहले दिन अपने सरकारी और निजी आवास पर लगे बिजली मीटरों पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने की घोषणा की। इसी के साथ उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और कांग्रेस विधायकों ने भी सब्सिडी छोड़ने पर सहमति जताई है। सीएम ने समर्थ लोगों से स्वेच्छा से बिजली छोड़ने की अपील की है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
नववर्ष के पहले दिन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपने सरकारी और निजी आवास पर लगे बिजली मीटरों पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने की घोषणा की। सीएम ने कहा, मेरे नाम से बिजली के पांच मीटर हैं। मुझे ही 625 यूनिट बिजली उपदान में मिल रही है।
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यह उपदान गरीब आदमी को मिलना चाहिए। सीएम ने कहा कि मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और कांग्रेस विधायकों ने भी सब्सिडी छोड़ने पर सहमति जताई है। सीएम ने समर्थ लोगों से स्वेच्छा से बिजली छोड़ने की अपील की है। बोर्ड ने प्रारूप तैयार किया है और इसे भरना होगा।
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सुक्खू ने सब्सिडी छोड़ने के लिए विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष को एक फार्म भरकर सौंपा। सीएम ने बुधवार को ओकओवर शिमला में प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समर्थ लोग इसे छोड़ें तो 200 करोड़ रुपये की मासिक बचत होगी। सीएम ने कहा कि वर्तमान सरकार ने जब सत्ता संभाली थी तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। उन्होंने फैसले किए, जिसके बाद अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। सभी स्रोतों से प्रदेश की आय 14,000 करोड़ से लेकर 16,000 करोड़ रुपये तक है। वह कब तक कर्ज पर कर्ज लेकर राज्य की अर्थव्यवस्था को चलाते रहेंगे। इसे कमजोर करते रहेंगे। दो साल में हमने 28 हजार करोड़ का कर्ज लिया। कर्ज इसलिए लिया, क्योंकि जो पिछला लोन था, उसमें 10 हजार करोड़ रुपये ब्याज के दिए और 8,000 करोड़ रुपये मूलधन का वापस किया।
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राज्य की संपदा की बात करें तो बजट पेश करते हुए भी वह अनुमान लगाते हैं कि बजट कितने हजार करोड़ रुपये का होगा, मगर पिछले कई वर्षों से उस बजट में होल चलता रहा है। यानी बजट 58 हजार करोड़ रुपये का प्रस्तुत किया गया है, लेकिन चार हजार करोड़ रुपये तक का जो कर, राजस्व और अनुदान आना चाहिए था, वह नहीं मिला। 4000 करोड़ रुपये का उस बजट में होल चलता रहा है।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के नाम से जाना जाएगा हिप्पा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) का नाम पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के नाम पर करने की घोषणा की। हिप्पा की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर बुधवार को सीएम ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी और कहा कि प्रदेश के विकास में उनका बड़ा योगदान रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) का नाम पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के नाम पर करने की घोषणा की। हिप्पा की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर बुधवार को सीएम ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी और कहा कि प्रदेश के विकास में उनका बड़ा योगदान रहा है।