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Chamba News: लेबर कोड के खिलाफ श्रमिकों ने बोला हल्ला, जमकर लगाए नारे
Wed, 26 Nov 2025 10:38 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 26 Nov 2025 10:38 PM IST
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चुराह (चंबा)। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड के विरोध में सीटू ब्लॉक कमेटी ने तीसा में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की अगुवाई सीटू जिला अध्यक्ष नरेंद्र ने की। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने जमकर नारेबाजी की।
इस प्रदर्शन में हाइड्रो प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन चांजू, एनएचपीसी, मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन, आंगनबाड़ी और मनरेगा निर्माण फेडरेशन से जुड़े सैकड़ों श्रमिक पहुंचे।
सभा को संबोधित करते हुए अध्यक्ष नरेंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूरों के 29 पुराने श्रम कानून खत्म कर दिए हैं और नए श्रम कोड के जरिये श्रमिकों के अधिकारों पर सीधा हमला बोला है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि नए नियमों से स्थायी रोजगार लगभग समाप्त हो जाएगा और ठेका प्रथा को कानूनी मजबूती मिल जाएगी। फिक्स टर्म रोजगार के प्रावधान को मजदूरों के शोषण का सबसे बड़ा हथियार बताते हुए उन्होंने कहा कि कंपनियों को किसी भी मजदूर को एक साल रखकर बाद में मनमर्जी से हटाने की खुली छूट दी गई है।
नरेंद्र ने यह भी कहा कि 100 कर्मचारियों की सीमा बढ़ाकर 300 करने से देश की ज्यादातर कंपनियां अब बिना सरकारी अनुमति छंटनी कर सकेंगी। वहीं, 20 कर्मचारियों से बढ़ाकर 50 करने के नियम ने छोटे संस्थानों में काम करने वाले मजदूरों को भी सुरक्षा दायरे से बाहर कर दिया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि हड़ताल पर सख्त पाबंदियों और विवादों को सीधे ट्रिब्यूनल भेजने जैसे प्रावधान मजदूरों की आवाज बुलंद होने से रोकने की साजिश हैं। पदाधिकारियों ने बताया कि यदि श्रम कोड वापस नहीं लिए गए तो संघर्ष को आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा।
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इस प्रदर्शन में हाइड्रो प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन चांजू, एनएचपीसी, मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन, आंगनबाड़ी और मनरेगा निर्माण फेडरेशन से जुड़े सैकड़ों श्रमिक पहुंचे।
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सभा को संबोधित करते हुए अध्यक्ष नरेंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूरों के 29 पुराने श्रम कानून खत्म कर दिए हैं और नए श्रम कोड के जरिये श्रमिकों के अधिकारों पर सीधा हमला बोला है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि नए नियमों से स्थायी रोजगार लगभग समाप्त हो जाएगा और ठेका प्रथा को कानूनी मजबूती मिल जाएगी। फिक्स टर्म रोजगार के प्रावधान को मजदूरों के शोषण का सबसे बड़ा हथियार बताते हुए उन्होंने कहा कि कंपनियों को किसी भी मजदूर को एक साल रखकर बाद में मनमर्जी से हटाने की खुली छूट दी गई है।
नरेंद्र ने यह भी कहा कि 100 कर्मचारियों की सीमा बढ़ाकर 300 करने से देश की ज्यादातर कंपनियां अब बिना सरकारी अनुमति छंटनी कर सकेंगी। वहीं, 20 कर्मचारियों से बढ़ाकर 50 करने के नियम ने छोटे संस्थानों में काम करने वाले मजदूरों को भी सुरक्षा दायरे से बाहर कर दिया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि हड़ताल पर सख्त पाबंदियों और विवादों को सीधे ट्रिब्यूनल भेजने जैसे प्रावधान मजदूरों की आवाज बुलंद होने से रोकने की साजिश हैं। पदाधिकारियों ने बताया कि यदि श्रम कोड वापस नहीं लिए गए तो संघर्ष को आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा।