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लोहे के गेट के बजाय पतली रस्सी से रोके जा रहे लकड़ी तस्कर
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लक्कड़मंडी में फॉरेस्ट चेक पोस्ट व निरीक्षण चौकी में वाहनों को रोकने के लिए लगी पतली रस्सी।
- फोटो : Chamba
खज्जियार(चंबा)। लक्कड़मंडी मार्ग पर लकड़ी तस्करों पर शिकंजा कसने और खज्जियार जाने वाले पर्यटकों की गाड़ियां रोकने के लिए लोहे के गेट की व्यवस्था नहीं हो पाई है। वर्तमान में एक पतली रस्सी के सहारे वाहनों को रोका जा रहा है। एक तरफ यहां चेक पोस्ट स्थापित है तो वहीं, दूसरी तरफ वन निरीक्षण चौकी भी है। लिहाजा, एक पतली रस्सी के सहारे वाहन तो नहीं रुक रहे हैं लेकिन कई बार यह रस्सी वाहनों से फंसकर टूट रही है। वहीं, वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों ने इस बारे अनभिज्ञता जाहिर की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार खज्जियार-लक्कड़मंडी मार्ग पर वन तस्करों को रोकने व पर्यटकों से ग्रीन सेस व सेंक्चुरी एरिया में प्रवेश करने के लिए शुल्क वसूली को चेक पोस्ट और वन निरीक्षण चौकी स्थापित की गई है। हर साल इसके लिए टेंडर किए जाते हैं। इस बार भी करीब 94 लाख रुपये में यह टेंडर अवार्ड हुआ है। हैरानी की बात तो यह है कि अब तक यहां लोहे के गेट की व्यवस्था नहीं हो पाई है। पतली रस्सी से ही वाहनों को रोका जा रहा है। जिससे कई बार वाहन चालक रस्सी तोड़कर भाग भी जाते हैं। लोगों में रमेश कुमार, सुरेंद्र सिंह, देवी चंद, अजय कुमार, रोहित कुमार ने वन्य प्राणी विभाग से मांग की है कि उक्त चेक पोस्ट के समीप ही लोहे के बैरियर का प्रावधान करवाया जाए।
वन्य प्राणी विभाग के उपमंडलाधिकारी राजीव कुमार का कहना है कि यह मामला उनके ध्यान में पहली बार आया है। जल्द ही उचित दिशा-निर्देश ठेकेदार को जारी किए जाएंगे।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार खज्जियार-लक्कड़मंडी मार्ग पर वन तस्करों को रोकने व पर्यटकों से ग्रीन सेस व सेंक्चुरी एरिया में प्रवेश करने के लिए शुल्क वसूली को चेक पोस्ट और वन निरीक्षण चौकी स्थापित की गई है। हर साल इसके लिए टेंडर किए जाते हैं। इस बार भी करीब 94 लाख रुपये में यह टेंडर अवार्ड हुआ है। हैरानी की बात तो यह है कि अब तक यहां लोहे के गेट की व्यवस्था नहीं हो पाई है। पतली रस्सी से ही वाहनों को रोका जा रहा है। जिससे कई बार वाहन चालक रस्सी तोड़कर भाग भी जाते हैं। लोगों में रमेश कुमार, सुरेंद्र सिंह, देवी चंद, अजय कुमार, रोहित कुमार ने वन्य प्राणी विभाग से मांग की है कि उक्त चेक पोस्ट के समीप ही लोहे के बैरियर का प्रावधान करवाया जाए।
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वन्य प्राणी विभाग के उपमंडलाधिकारी राजीव कुमार का कहना है कि यह मामला उनके ध्यान में पहली बार आया है। जल्द ही उचित दिशा-निर्देश ठेकेदार को जारी किए जाएंगे।
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