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Chamba News: बेमौसमी फूलगोभी ने बदली प्रीतम की जिंदगी
Mon, 16 Mar 2026 10:27 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 16 Mar 2026 10:27 PM IST
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खेती के जरिये लाखों की आमदमी कमा रही हैं कीड़ी पंचायत की प्रीतम कुमारी
गृहस्थी संभालने के साथ 12 सालों से उगा रही हैं उत्तम किस्म की फूलगोभी
बाजार में मिल रहे बेहतर दाम, आसपास की महिलाओं को भी खेती से जोड़ा
नेक सिंह ठाकुर
साहो (चंबा)। जिले के कीड़ी पंचायत के लग्गा गांव की प्रीतम कुमारी ने यह साबित किया है कि महिलाएं मेहनत के साथ हौसला रखें तो पहाड़ों में भी खेती के जरिये लाखों की आमदनी कमा सकती हैं। गृहस्थी के काम संभालते हुए वह पिछले 12 वर्षों से अपने खेतों में उच्च किस्म की बेमौसमी फूलगोभी उगा रही हैं।
उनकी फूलगोभी चंबा बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती है। हर सीजन में उन्हें शानदार मुनाफा होता है। प्रीतम बताती हैं कि महिलाएं अगर मेहनत कर खुद के लिए शुरुआत करें तो आत्मनिर्भर बन सकती हैं। प्रीतम न केवल खुद सफल हैं, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी खेती की ओर प्रेरित कर रही हैं। उनका कहना है कि पहाड़ी जीवन में खेती ही सबसे बड़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता का साधन है। घर संभालने के साथ थोड़ी मेहनत खेत में करें तो न केवल आमदनी बढ़ती है, बल्कि समाज में पहचान भी बनती है। प्रीतम के पति हेमराज शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हैं। उनका बेटा भारतीय सेना में तैनात है। बावजूद इसके उन्होंने खेती को कभी नहीं छोड़ा। उनका कहना है कि खेती न केवल आमदनी का जरिया है, बल्कि प्रकृति और जीवन के संतुलन से जुड़ाव का माध्यम भी है। उनका कहना है कि फूलगोभी की फसल दिसंबर में बोई जाती है और मार्च-अप्रैल में बिक्री होती है। इस बार जल्दी गर्मी और नमी कम होने से फसल प्रभावित हुई लेकिन हाल ही में हुई बर्फबारी ने खेतों में नमी बढ़ाकर फसल को लाभ पहुंचाया।
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गृहस्थी संभालने के साथ 12 सालों से उगा रही हैं उत्तम किस्म की फूलगोभी
बाजार में मिल रहे बेहतर दाम, आसपास की महिलाओं को भी खेती से जोड़ा
नेक सिंह ठाकुर
साहो (चंबा)। जिले के कीड़ी पंचायत के लग्गा गांव की प्रीतम कुमारी ने यह साबित किया है कि महिलाएं मेहनत के साथ हौसला रखें तो पहाड़ों में भी खेती के जरिये लाखों की आमदनी कमा सकती हैं। गृहस्थी के काम संभालते हुए वह पिछले 12 वर्षों से अपने खेतों में उच्च किस्म की बेमौसमी फूलगोभी उगा रही हैं।
उनकी फूलगोभी चंबा बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती है। हर सीजन में उन्हें शानदार मुनाफा होता है। प्रीतम बताती हैं कि महिलाएं अगर मेहनत कर खुद के लिए शुरुआत करें तो आत्मनिर्भर बन सकती हैं। प्रीतम न केवल खुद सफल हैं, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी खेती की ओर प्रेरित कर रही हैं। उनका कहना है कि पहाड़ी जीवन में खेती ही सबसे बड़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता का साधन है। घर संभालने के साथ थोड़ी मेहनत खेत में करें तो न केवल आमदनी बढ़ती है, बल्कि समाज में पहचान भी बनती है। प्रीतम के पति हेमराज शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हैं। उनका बेटा भारतीय सेना में तैनात है। बावजूद इसके उन्होंने खेती को कभी नहीं छोड़ा। उनका कहना है कि खेती न केवल आमदनी का जरिया है, बल्कि प्रकृति और जीवन के संतुलन से जुड़ाव का माध्यम भी है। उनका कहना है कि फूलगोभी की फसल दिसंबर में बोई जाती है और मार्च-अप्रैल में बिक्री होती है। इस बार जल्दी गर्मी और नमी कम होने से फसल प्रभावित हुई लेकिन हाल ही में हुई बर्फबारी ने खेतों में नमी बढ़ाकर फसल को लाभ पहुंचाया।
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