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Himachal: बिजली के झटकों से नहीं टूटे अजय शर्मा ने बल्ले से तोड़ दिया रिकॉर्ड, 50 गेंदों में बना डाले 176 रन

Sat, 28 Mar 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा।
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 28 Mar 2026 06:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के अजय शर्मा ने दर्द, गरीबी और लंबी जद्दोजहद को पीछे छोड़ते हुए 50 गेंदों में 176 रन की विस्फोटक पारी खेलकर इंडिया पैरा क्रिकेट में इतिहास रच दिया। 

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Undeterred by electric shocks, Ajay Sharma shattered records with his bat, smashing 176 runs off just 50 balls
बिजली के झटकों से नहीं टूटे अजय शर्मा ने बल्ले से तोड़ दिया रिकॉर्ड। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 जो युवक बिजली के झटकों से नहीं टूटा, उसी अजय शर्मा ने बल्ले से रिकॉर्ड तोड़ दिया। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के अजय शर्मा ने दर्द, गरीबी और लंबी जद्दोजहद को पीछे छोड़ते हुए 50 गेंदों में 176 रन की विस्फोटक पारी खेलकर इंडिया पैरा क्रिकेट में इतिहास रच दिया। यह सिर्फ एक पारी नहीं, बल्कि उस हौसले की गूंज है जिसने हार मानने से इन्कार कर दिया। पैरा क्रिकेट के इतिहास में चंबा के अजय शर्मा ने विश्व रिकॉर्ड बनाया है। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में आयोजित जोनल क्रिकेट टूर्नामेंट में अजय ने सेंटर जोन के खिलाफ 15 ओवर के मैच में महज 50 गेंदों में 176 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस पारी में 19 छक्के और 12 चौके शामिल रहे। उन्होंने केवल 28 गेंदों में अपना शतक पूरा कर लिया। इससे पहले मध्य प्रदेश के ग्वालियर के योगेंद्र भदौरिया के नाम रिकाॅर्ड था, जिन्होंने 31 गेंदों में 100 रन बनाए थे। हिमाचल प्रदेश दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर ने बताया कि प्रतियोगिता में देश के पांच जोन भाग ले रहे हैं। अजय जिले के छोटे से गांव जुम्महार के रहने वाले हैं। उनके पिता चाय की रेहड़ी चलाते हैं। अजय ने राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चंबा से कॉमर्स संकाय में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की।

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हादसे ने बदली जिंदगी
अजय की जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब वह अपने पिता की रेहड़ी पर तिरपाल ठीक कर रहे थे। इसी दौरान हाई वोल्टेज बिजली के तारों की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए। वह नौ दिन तक कोमा में रहे। उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। वहां आठ ऑपरेशन हुए। इलाज पर 15 लाख से अधिक खर्च आया। इसके लिए परिवार को बैंक से ऋण लेना पड़ा। करीब तीन साल बाद अजय चलने लगे। एक साल तक अवसाद से भी जूझते रहे।

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कोच योगराज सिंह का मिला मार्गदर्शन
अजय अपनी सफलता का श्रेय कोच योगराज सिंह को देते हैं। वह पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता हैं। उनके मार्गदर्शन में अजय ने अपने खेल को नई दिशा दी। अजय अब तक 15 से अधिक राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग ले चुके हैं। वह चेन्नई में इंडिया ए टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने सात राष्ट्रीय और एक अंतरराष्ट्रीय पैरा प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है। बावजूद इसके अजय को प्रदेश सरकार से कोई विशेष आर्थिक सहायता नहीं मिली है।

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