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Chamba News: जिस्म दो, चिता एक, मोती राम, बबली की विदाई ने हर दिल को झकझोर दिया
Fri, 19 Jun 2026 10:37 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 19 Jun 2026 10:37 PM IST
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चंबा के मेहल गांव में मृतकों की अंतिम यात्रा के दौरान उमड़ी लोगों की भीड़। स्रोत - विड़ियों ग्
राजकीय सम्मान के साथ दी मोती राम को अंतिम विदाई, 47वीं बटालियन की टुकड़ी ने दी सलामी
बड़े बेटे ने दी मुखाग्नि, थमने का नाम नहीं ले रहे थे छोटे बेटे की आंखों से आंसू
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। गांव और क्षेत्र के लिए बीते मंगलवार का दिन बेहद दर्दनाक रहा। शोक और गमगीन माहौल के बीच अरुणाचल प्रदेश में आईटीबीपी में सेवारत मोती राम और उनकी पत्नी बबली देवी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने नम आंखों से अपने प्रियजनों को आखिरी सलाम किया। हर किसी की जुबान पर बस यही था कि एक ही चिता के सामने परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटेगा, किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
अंतिम संस्कार के दौरान सबसे मार्मिक क्षण तब आया जब परिवार के बड़े बेटे कमल किशोर ने अपने पिता मोती राम को मुखाग्नि दी। छोटे बेटे लक्की की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। परिजनों का दर्द देखकर कई लोग अपने आंसू नहीं रोक सके और पूरा वातावरण शोक में डूब गया। गांव में हर ओर शोक का माहौल दिखाई दिया और लोगों की आंखों में अपनों को खोने का दर्द साफ झलक रहा था।
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जेएंडके के सांबा से पहुंची बटालियन की टुकड़ी
दिवंगत मोती राम को सम्मान देने के लिए जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के घगवाल स्थित 47वीं बटालियन की टुकड़ी विशेष रूप से पहुंची। जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। सैन्य सम्मान के दौरान माहौल अत्यंत भावुक हो गया और उपस्थित लोगों ने मौन रखकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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पूरे क्षेत्र में शोक की लहर
शोकसभा में उपस्थित लोगों ने दिवंगत दंपती के निधन को परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया। वक्ताओं ने कहा कि मोती राम का सरल स्वभाव और समाज के प्रति उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। सभी ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
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... लोगों को झकझोरती रहीं सिसकियां
राजकीय सम्मान, सैन्य सलामी और हजारों नम आंखों के बीच मोती राम और उनकी पत्नी पंचतत्व में विलीन हो गए। अंतिम यात्रा के दौरान गूंजते श्रद्धांजलि के स्वर और परिजनों की सिसकियां लंबे समय तक लोगों के दिलों को झकझोरती रहीं। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लोग नम आंखों से उन्हें याद कर रहे हैं।
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बड़े बेटे ने दी मुखाग्नि, थमने का नाम नहीं ले रहे थे छोटे बेटे की आंखों से आंसू
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। गांव और क्षेत्र के लिए बीते मंगलवार का दिन बेहद दर्दनाक रहा। शोक और गमगीन माहौल के बीच अरुणाचल प्रदेश में आईटीबीपी में सेवारत मोती राम और उनकी पत्नी बबली देवी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने नम आंखों से अपने प्रियजनों को आखिरी सलाम किया। हर किसी की जुबान पर बस यही था कि एक ही चिता के सामने परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटेगा, किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
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अंतिम संस्कार के दौरान सबसे मार्मिक क्षण तब आया जब परिवार के बड़े बेटे कमल किशोर ने अपने पिता मोती राम को मुखाग्नि दी। छोटे बेटे लक्की की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। परिजनों का दर्द देखकर कई लोग अपने आंसू नहीं रोक सके और पूरा वातावरण शोक में डूब गया। गांव में हर ओर शोक का माहौल दिखाई दिया और लोगों की आंखों में अपनों को खोने का दर्द साफ झलक रहा था।
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जेएंडके के सांबा से पहुंची बटालियन की टुकड़ी
दिवंगत मोती राम को सम्मान देने के लिए जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के घगवाल स्थित 47वीं बटालियन की टुकड़ी विशेष रूप से पहुंची। जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। सैन्य सम्मान के दौरान माहौल अत्यंत भावुक हो गया और उपस्थित लोगों ने मौन रखकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
पूरे क्षेत्र में शोक की लहर
शोकसभा में उपस्थित लोगों ने दिवंगत दंपती के निधन को परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया। वक्ताओं ने कहा कि मोती राम का सरल स्वभाव और समाज के प्रति उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। सभी ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
... लोगों को झकझोरती रहीं सिसकियां
राजकीय सम्मान, सैन्य सलामी और हजारों नम आंखों के बीच मोती राम और उनकी पत्नी पंचतत्व में विलीन हो गए। अंतिम यात्रा के दौरान गूंजते श्रद्धांजलि के स्वर और परिजनों की सिसकियां लंबे समय तक लोगों के दिलों को झकझोरती रहीं। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लोग नम आंखों से उन्हें याद कर रहे हैं।