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व्यवहार में निरंकार होना चाहिए : महात्मा रत्न चंद

Sun, 01 Sep 2024 09:46 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Sun, 01 Sep 2024 09:46 PM IST
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There should be shamelessness in behavior: Mahatma Ratan Chand
चंबा के सत्संग भवन मुगला में सत्संग सुनते श्रद्धालू।संवाद
बनीखेत (चंबा)। निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में साप्ताहिक सत्संग हुआ। महात्मा रत्न चंद ने कहा कि ब्रह्म ज्ञान सतगुरु की कृपा से प्राप्त होता है। उस पर विश्वास महापुरुषों की संगत में आने से ही दृढ़ होता है।
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जैसे-जैसे हम सत्संग करते हैं, वैसे-वैसे हमारा मन स्थिर होता जाता है। मन को शक्ति मिलती है, क्योंकि उसको पता लग जाता है कि सर्व शक्तिमान परमात्मा, जो निराकार है अंग संग है। सत्संग में आने से ही उसे विश्वास होता है कि सब सुखों को देने वाला निरंकार प्रभु ही है। उन्होंने कहा कि मनुष्य योनि अति दुर्लभ है। इसी दुर्लभ योनि में परमात्मा का बोध हो सकता है। अगर मनुष्य योनि में आकर भी हमने कण-कण में व्याप्त इस निराकार सत्ता अर्थात परमात्मा का बोध नहीं किया तो यह मान लेना चाहिए कि मनुष्य योनि का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है। महात्मा ने कहा कि निरंकारी मिशन के उपदेशों का अनुसरण ही मिशन की शिक्षा है। हमारा व्यवहार सौहार्दपूर्ण और मेल-मिलाप वाला होना चाहिए। व्यवहार से निरंकारी होना चाहिए न कि हम बोल कर बताएं कि हम निरंकारी हैं। संवाद
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