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Chamba News: तागी और टाटरी की पीड़ा...पीठ पर ढो रहे सड़क का बोझ
Fri, 06 Dec 2024 10:50 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 06 Dec 2024 10:50 PM IST
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धरवाला (चंबा)। भरमौर विधानसभा क्षेत्र के तागी और टाटरी गांव के 300 परिवारों के लिए सड़क सुविधा सपना ही बनी हुई है। आज भी ग्रामीण सड़क सुविधा से अछूते हैं। ग्रामीणों को रंज है कि 30 वर्षों में निरंतर सड़क सुविधा के लिए मांग उठाने के बावजूद अब तक उनके गांव सड़क सुविधा से ही नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क के अभाव में यदि कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे पीठ पर या फिर पालकी के जरिये ही तीन से पांच किलोमीटर का सफर तय कर नेशनल हाईवे तक पहुंचाना पड़ता है।
सके बाद ही वाहन के जरिये मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है। इतना ही नहीं, लोगों को गृह निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए 150 से 200 रुपये प्रति बैग खच्चर मालिकों को चुकता करने पड़ते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेताया है कि अब यदि उनके गांवों को सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा जाता है तो वे आगामी चुनाव का बहिष्कार करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
परिचर्चा
एक तरफ सरकार 250 की आबादी को सड़क सुविधा से जोड़ने की बात करती है तो वहीं, दूसरी ओर तागी और टाटरी गांव 300 की आबादी होने के बावजूद भी सड़क सुविधा से अछूते हैं।
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रविंद्र कुमार, ग्रामीण
सड़क के अभाव में यदि गांव में कोई बीमार हो जाता है तो उसे पीठ पर लाद कर या पालकी में उठाकर तीन घंटे का सफर तय कर नेशनल हाईवे तक पहुंचाना पड़ता है। उसके बाद ही वाहन के जरिये मरीज को अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
मान सिंह, ग्रामीण
गृह निर्माण का कार्य करवाना या मरम्मत करवाना भी ग्रामीणों के लिए बिना सड़क के चुनौतीपूर्ण ही है। सड़क से गृह निर्माण सामग्री को घरों तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को प्रति खच्चर के रूप में उन्हें 150 से 200 रुपये अदा करने पड़ते हैं।
संदीप कुमार, ग्रामीण
तागी और टाटरी गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग कई बार राजनेताओं, शासन-प्रशासन से करते आ रहे हैं। बावजूद इसके अभी तक उन्हें आश्वासनों के सिवाय कुछ नहीं मिला है।
प्रीतम कुमार, ग्रामीण
सड़क का सर्वे करवा कर वन विभाग की अनुमति के लिए फाइल भेजी गई है। वन विभाग की अनुमति मिलने के बाद सड़क निर्माण के लिए आगामी औपचारिकताएं पूरी कर कार्य करवाने की योजना हैं।
राकेश मरोल, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग उपमंडल राख
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सके बाद ही वाहन के जरिये मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है। इतना ही नहीं, लोगों को गृह निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए 150 से 200 रुपये प्रति बैग खच्चर मालिकों को चुकता करने पड़ते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेताया है कि अब यदि उनके गांवों को सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा जाता है तो वे आगामी चुनाव का बहिष्कार करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
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परिचर्चा
एक तरफ सरकार 250 की आबादी को सड़क सुविधा से जोड़ने की बात करती है तो वहीं, दूसरी ओर तागी और टाटरी गांव 300 की आबादी होने के बावजूद भी सड़क सुविधा से अछूते हैं।
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रविंद्र कुमार, ग्रामीण
सड़क के अभाव में यदि गांव में कोई बीमार हो जाता है तो उसे पीठ पर लाद कर या पालकी में उठाकर तीन घंटे का सफर तय कर नेशनल हाईवे तक पहुंचाना पड़ता है। उसके बाद ही वाहन के जरिये मरीज को अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
मान सिंह, ग्रामीण
गृह निर्माण का कार्य करवाना या मरम्मत करवाना भी ग्रामीणों के लिए बिना सड़क के चुनौतीपूर्ण ही है। सड़क से गृह निर्माण सामग्री को घरों तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को प्रति खच्चर के रूप में उन्हें 150 से 200 रुपये अदा करने पड़ते हैं।
संदीप कुमार, ग्रामीण
तागी और टाटरी गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग कई बार राजनेताओं, शासन-प्रशासन से करते आ रहे हैं। बावजूद इसके अभी तक उन्हें आश्वासनों के सिवाय कुछ नहीं मिला है।
प्रीतम कुमार, ग्रामीण
सड़क का सर्वे करवा कर वन विभाग की अनुमति के लिए फाइल भेजी गई है। वन विभाग की अनुमति मिलने के बाद सड़क निर्माण के लिए आगामी औपचारिकताएं पूरी कर कार्य करवाने की योजना हैं।
राकेश मरोल, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग उपमंडल राख