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Chamba News: स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं मिल रहा एंटी रेबीज का टीका
Wed, 08 Jul 2026 10:59 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 08 Jul 2026 10:59 PM IST
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पीड़ितों को लगानी पड़ रही निजी अस्पतालों की दौड़, दूरदराज क्षेत्र के लोग परेशान
बोले- 400 रुपये में बाजार से एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीदकर लाने को विवश हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। जानलेवा रेबीज से बचाव का सबसे अहम हथियार सरकारी अस्पतालों से गायब है। डलहौजी उपमंडल के कई स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रेबीज टीकों का स्टॉक खत्म होने से लावारिस कुत्ते, बंदर या अन्य संदिग्ध जानवरों के काटने वाले मरीज इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं। मुफ्त मिलने वाला टीका अब लोगों को बाजार से करीब 400 रुपये में खरीदना पड़ रहा है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनीखेत, मेल और बगढ़ार और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बाथरी में एंटी रेबीज टीकों का स्टॉक खत्म है। ऐसे में लावारिस कुत्ते, बंदर या अन्य संदिग्ध जानवर के काटने पर मरीजों को तत्काल उपचार के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण दूरदराज के गांवों से आने वाले मरीजों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है।
लोगों में विकास कुमार, संजीव कुमार, नीरज सिंह, अर्जुन कुमार और विनायक ने बताया कि बरसात के मौसम में लावारिस कुत्तों और बंदरों के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जीवन रक्षक टीकों की अनुपलब्धता चिंता का विषय है। उनका कहना है कि मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने से समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम सिंह ने बताया कि संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध न होने की जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर जल्द आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
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तुरंत घाव को धोएं, टीका जरूर लगवाएं
चिकित्सकों के अनुसार रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है। इसके लक्षण दिखने के बाद मरीज को बचा पाना लगभग असंभव होता है। इसलिए संदिग्ध जानवर के काटने के तुरंत बाद घाव को साबुन और बहते पानी से धोने के साथ बिना देरी किए एंटी रेबीज टीका लगवाना आवश्यक है। गंभीर मामलों में एंटी रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन भी लगाया जाता है।
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बोले- 400 रुपये में बाजार से एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीदकर लाने को विवश हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। जानलेवा रेबीज से बचाव का सबसे अहम हथियार सरकारी अस्पतालों से गायब है। डलहौजी उपमंडल के कई स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रेबीज टीकों का स्टॉक खत्म होने से लावारिस कुत्ते, बंदर या अन्य संदिग्ध जानवरों के काटने वाले मरीज इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं। मुफ्त मिलने वाला टीका अब लोगों को बाजार से करीब 400 रुपये में खरीदना पड़ रहा है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनीखेत, मेल और बगढ़ार और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बाथरी में एंटी रेबीज टीकों का स्टॉक खत्म है। ऐसे में लावारिस कुत्ते, बंदर या अन्य संदिग्ध जानवर के काटने पर मरीजों को तत्काल उपचार के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण दूरदराज के गांवों से आने वाले मरीजों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है।
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लोगों में विकास कुमार, संजीव कुमार, नीरज सिंह, अर्जुन कुमार और विनायक ने बताया कि बरसात के मौसम में लावारिस कुत्तों और बंदरों के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जीवन रक्षक टीकों की अनुपलब्धता चिंता का विषय है। उनका कहना है कि मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने से समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम सिंह ने बताया कि संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध न होने की जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर जल्द आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
तुरंत घाव को धोएं, टीका जरूर लगवाएं
चिकित्सकों के अनुसार रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है। इसके लक्षण दिखने के बाद मरीज को बचा पाना लगभग असंभव होता है। इसलिए संदिग्ध जानवर के काटने के तुरंत बाद घाव को साबुन और बहते पानी से धोने के साथ बिना देरी किए एंटी रेबीज टीका लगवाना आवश्यक है। गंभीर मामलों में एंटी रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन भी लगाया जाता है।