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नेता आश्वासन देते रहे, सरकारें बदलती रहीं, मुद्दा वही
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सलूणी (चंबा)। ग्राम पंचायत सलूूणी के नंदला गांव की 250 की आबादी आजादी के 75 साल बाद भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाई है। इस गांव में रहने वाले लोग अनुसूचित जनजाति से संबंध रखते हैं जो लंबे समय से यहां सड़क बनवाने की मांग कर रहे हें। आज तक किसी भी सरकार ने गांव तक सड़क नहीं बनवाई। इसको लेकर ग्रामीणों में रोष है।
हालात यह हैं कि गांव के लोगों को राशन या अन्य जरूरी सामान गांव तक खच्चर पर लादकर पहुंचाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें प्रति खच्चर 100 रुपये बतौर भाड़ा चुकाने पड़ते हैं। घर बनाने के लिए ग्रामीणों को सबसे पहले निर्माण सामग्री गांव तक पहुंचाना सबसे बड़ी मुसीबत बन जाती है। इसके अलावा कोई व्यक्ति गांव में अगर बीमार हो जाए तो उसे पीठ या पालकी में उठाकर दो किलोमीटर पैदल लेकर जाना पड़ता है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इससे कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं लेकिन किसी भी सरकार ने ग्रामीणों की इस समस्या के समाधान को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों चुनीलाल, हेमराज, हिमिया राम और भगत सिंह ने बताया कि सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के लिए विशेष सुविधा देती है लेकिन आज तक की सरकारों ने नंदला गांव की हमेशा अनदेखी की है। इस बार ग्रामीणों ने निर्णय किया है कि विधानसभा चुनाव में उसी राजनीतिक दल के प्रत्याशी को वोट डालेंगे जो उनके गांव में सड़क बनाने की हामी भरेगा अन्यथा ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार भी कर सकते हैं। क्योंकि आजादी के बाद से मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे इन लोगों की सब्र का बांध अब टूट चुका है।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता दीपक महाजन ने बताया कि गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए सर्वे हो चुका है। अन्य दस्तावेजों को तैयार किया जा रहा है। दस्तावेज पूरे होने के बाद आगामी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
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हालात यह हैं कि गांव के लोगों को राशन या अन्य जरूरी सामान गांव तक खच्चर पर लादकर पहुंचाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें प्रति खच्चर 100 रुपये बतौर भाड़ा चुकाने पड़ते हैं। घर बनाने के लिए ग्रामीणों को सबसे पहले निर्माण सामग्री गांव तक पहुंचाना सबसे बड़ी मुसीबत बन जाती है। इसके अलावा कोई व्यक्ति गांव में अगर बीमार हो जाए तो उसे पीठ या पालकी में उठाकर दो किलोमीटर पैदल लेकर जाना पड़ता है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इससे कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं लेकिन किसी भी सरकार ने ग्रामीणों की इस समस्या के समाधान को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया।
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ग्रामीणों चुनीलाल, हेमराज, हिमिया राम और भगत सिंह ने बताया कि सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के लिए विशेष सुविधा देती है लेकिन आज तक की सरकारों ने नंदला गांव की हमेशा अनदेखी की है। इस बार ग्रामीणों ने निर्णय किया है कि विधानसभा चुनाव में उसी राजनीतिक दल के प्रत्याशी को वोट डालेंगे जो उनके गांव में सड़क बनाने की हामी भरेगा अन्यथा ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार भी कर सकते हैं। क्योंकि आजादी के बाद से मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे इन लोगों की सब्र का बांध अब टूट चुका है।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता दीपक महाजन ने बताया कि गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए सर्वे हो चुका है। अन्य दस्तावेजों को तैयार किया जा रहा है। दस्तावेज पूरे होने के बाद आगामी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।