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Chamba News: कहीं बारिश न झाड़ दे सेब पर खिले उम्मीदों के फूल
Mon, 01 Apr 2024 03:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 01 Apr 2024 03:39 AM IST
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चंबा। जिले के सेब बाहुल्य क्षेत्रों में पेड़ों पर उम्मीदों के फूल खिलने शुरू हो गए हैं। जिले के बागवान भी बेहतर फसल होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन उन्हें डर सता रहा है कि कहीं बारिश और अंधड़ से सेब के फूल न झड़ जाएं।
बागवानों का कहना है कि बेमौसमी बारिश उनकी उम्मीदों पर पानी फेर सकती है। उन्होंने कहा कि इस समय बारिश नहीं होनी चाहिए। इससे सेब की पैदावार प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि सेब के पेड़ों पर फूल आने के समय ज्यादा बारिश अच्छे संकेत नहीं हैं। इससे मधु मिक्खयों की ओर से की जाने वाली परागण प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। तापमान ठंडा होने से फ्लावरिंग की प्रक्रिया भी धीमी हो सकती है। किशन चंद, खेम राज, दीवान चंद, रोशन लाल, महिंद्र कुमार, राज कुमार, रतन चंद और प्रदीप कुमार आदि बागवानों ने कहा कि ज्यादा बारिश से प्लम, आड़ू और खुमानी की फसल भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अभी जिले के ऊंचाई और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में सेब के पेड़ों पर फूल नहीं खिले हैं, लेकिन अगर बारिश ऐसे ही होती रही तो इसका फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। तापमान में लगातार गिरावट आने के कारण उपज प्रभावित हो सकती है। साथ ही ऊपरी क्षेत्रों में ओलावृष्टि होती है तो इससे नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है। गौरतलब है कि इस साल दिसंबर और जनवरी महीने में बारिश नहीं। फरवरी से बारिश का क्रम शुरू हुआ है। सेब की पैदावार के अनुकूल इस बार बारिश और बर्फबारी हुई है, जबकि नियमित अंतराल के बाद होने वाली बारिश से भी अन्य फसलों को लाभ मिला है। अब सेब के पेड़ों में फूल आना शुरू हो गए हैं। ऐसे में बारिश होती है तो इससे पैदावार पर विपरीत असर पड़ेगा।
उधर, उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने कहा कि इन दिनों हो रही बारिश सेब के लिए अच्छी नहीं है। इससे सेब के साथ प्लम, आड़ू और खुमानी की उपज भी प्रभावित हो सकती है।
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बागवानों का कहना है कि बेमौसमी बारिश उनकी उम्मीदों पर पानी फेर सकती है। उन्होंने कहा कि इस समय बारिश नहीं होनी चाहिए। इससे सेब की पैदावार प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि सेब के पेड़ों पर फूल आने के समय ज्यादा बारिश अच्छे संकेत नहीं हैं। इससे मधु मिक्खयों की ओर से की जाने वाली परागण प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। तापमान ठंडा होने से फ्लावरिंग की प्रक्रिया भी धीमी हो सकती है। किशन चंद, खेम राज, दीवान चंद, रोशन लाल, महिंद्र कुमार, राज कुमार, रतन चंद और प्रदीप कुमार आदि बागवानों ने कहा कि ज्यादा बारिश से प्लम, आड़ू और खुमानी की फसल भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अभी जिले के ऊंचाई और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में सेब के पेड़ों पर फूल नहीं खिले हैं, लेकिन अगर बारिश ऐसे ही होती रही तो इसका फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। तापमान में लगातार गिरावट आने के कारण उपज प्रभावित हो सकती है। साथ ही ऊपरी क्षेत्रों में ओलावृष्टि होती है तो इससे नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है। गौरतलब है कि इस साल दिसंबर और जनवरी महीने में बारिश नहीं। फरवरी से बारिश का क्रम शुरू हुआ है। सेब की पैदावार के अनुकूल इस बार बारिश और बर्फबारी हुई है, जबकि नियमित अंतराल के बाद होने वाली बारिश से भी अन्य फसलों को लाभ मिला है। अब सेब के पेड़ों में फूल आना शुरू हो गए हैं। ऐसे में बारिश होती है तो इससे पैदावार पर विपरीत असर पड़ेगा।
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उधर, उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने कहा कि इन दिनों हो रही बारिश सेब के लिए अच्छी नहीं है। इससे सेब के साथ प्लम, आड़ू और खुमानी की उपज भी प्रभावित हो सकती है।
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