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Chamba News: थाने पहुंचे पिता, कहा- मौत के बाद हमें बताया नहीं, सीधे अस्पताल ले गए युवक
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भरमौर (चंबा)। संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले बेटे की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच करवाने के लिए भरमौर में संचुई के गांव बाड़ी निवासी रमेश कुमार ने भरमौर थाने में ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने पंजाब के जालंधर से उनके बेटे रोहित के साथ ठहरे युवकों पर आरोप लगाया कि उन्होंने मौत के बाद सूचना नहीं दी और सीधे अस्पताल ले गए। उन्होंने मांग की है कि पुलिस एफआईआर दर्ज करके उन युवाओं से गहनता से पूछताछ करे, जो कि अंतिम समय में उनके बेटे के साथ थे।
रमेश कुमार ने बताया कि डॉक्टर के अनुसार मौत के चार घंटे बाद उसे अस्पताल लाया गया। ऐसे में चार घंटे तक उसे बंद कमरे में क्यों रखा गया, उनके बीच ऐसा क्या हुआ, जिस कारण उसकी मौत हो गई। जहां पर उसकी मौत हुई वह उसके चाचा का घर था, जो कि उनके घर से महज 10 फीट की दूरी पर है। ऐसे में उन्हें सूचित करने में ज्यादा समय भी नहीं लगना था, लेकिन मौत के बाद उसे सीधे अस्पताल पहुंचा दिया गया।
उन्होंने कहा कि 7 फरवरी को उनके भतीजे तरुण ने बेटे को अपने कमरे में सोते हुए देखा, उसके साथ कमरे में दो किरायेदार जिवांशु दुआ (30) निवासी बस्ती पीर डाढ़ महाराजा गार्डन, जालंधर और कर्ण (25) निवासी मखदुमपुरा, जालंधर भी थे। अगले दिन सुबह 5:50 बजे दोनों ने किसी अन्य मित्र को बुलाकर उनके बेटे को अस्पताल ले गए।
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उन्होंने यह भी कहा कि उनके बेटे को किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या नहीं थी। ऐसे में अचानक मौत हो जाना काफी चिंताजनक है। समस्त परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि मेरे पुत्र की मृत्यु प्राकृतिक या साधारण दुर्घटना नहीं बल्कि संभावित आपराधिक कृत्य का परिणाम हो सकती है। इसमें निष्पक्ष, गहन एवं वैज्ञानिक जांच होना जरूरी है। पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
अगले दिन इन युवकों से पकड़ा था चिट्टा
7 फरवरी को हुई रोहित की मौत के मामले में पुलिस को प्रारंभिक जांच में नशे की ओवरडोज से मौत की आशंका है। मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब 8 फरवरी को रोहित के साथ ठहरे पंजाब के जालंधर से कर्ण और जिवांशु को पुलिस ने 2.15 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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रमेश कुमार ने बताया कि डॉक्टर के अनुसार मौत के चार घंटे बाद उसे अस्पताल लाया गया। ऐसे में चार घंटे तक उसे बंद कमरे में क्यों रखा गया, उनके बीच ऐसा क्या हुआ, जिस कारण उसकी मौत हो गई। जहां पर उसकी मौत हुई वह उसके चाचा का घर था, जो कि उनके घर से महज 10 फीट की दूरी पर है। ऐसे में उन्हें सूचित करने में ज्यादा समय भी नहीं लगना था, लेकिन मौत के बाद उसे सीधे अस्पताल पहुंचा दिया गया।
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उन्होंने कहा कि 7 फरवरी को उनके भतीजे तरुण ने बेटे को अपने कमरे में सोते हुए देखा, उसके साथ कमरे में दो किरायेदार जिवांशु दुआ (30) निवासी बस्ती पीर डाढ़ महाराजा गार्डन, जालंधर और कर्ण (25) निवासी मखदुमपुरा, जालंधर भी थे। अगले दिन सुबह 5:50 बजे दोनों ने किसी अन्य मित्र को बुलाकर उनके बेटे को अस्पताल ले गए।
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उन्होंने यह भी कहा कि उनके बेटे को किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या नहीं थी। ऐसे में अचानक मौत हो जाना काफी चिंताजनक है। समस्त परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि मेरे पुत्र की मृत्यु प्राकृतिक या साधारण दुर्घटना नहीं बल्कि संभावित आपराधिक कृत्य का परिणाम हो सकती है। इसमें निष्पक्ष, गहन एवं वैज्ञानिक जांच होना जरूरी है। पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
अगले दिन इन युवकों से पकड़ा था चिट्टा
7 फरवरी को हुई रोहित की मौत के मामले में पुलिस को प्रारंभिक जांच में नशे की ओवरडोज से मौत की आशंका है। मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब 8 फरवरी को रोहित के साथ ठहरे पंजाब के जालंधर से कर्ण और जिवांशु को पुलिस ने 2.15 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।