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Chamba News: दशनामी अखाड़ा की छड़ी बनी डल झील की परंपरा की साक्षी
Fri, 18 Sep 2026 10:59 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 18 Sep 2026 10:59 PM IST
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चंबा में मण्मिहेश डल झील तौड़ने की रस्म निभाते शिव के गुर।स्रोत विड़ियो ग्रैब
पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने निभाई डल झील तोड़ने की पारंपरिक रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मणिमहेश यात्रा के दौरान दशनामी अखाड़ा की छड़ी पवित्र डल झील पहुंची। छड़ी के साथ पहुंचे साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया। धार्मिक अनुष्ठान के बाद श्रद्धालु डल झील तोड़ने की पारंपरिक रस्म के साक्षी बने।
इस दौरान हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयकारों से डल झील का क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पवित्र झील में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। मणिमहेश यात्रा में दशनामी अखाड़ा की छड़ी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। देशभर से पहुंचे श्रद्धालु इस धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बने। साधु-संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में परंपरागत विधि से पूजा संपन्न होने के बाद डल झील तोड़ने की रस्म निभाई गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मणिमहेश यात्रा के दौरान दशनामी अखाड़ा की छड़ी पवित्र डल झील पहुंची। छड़ी के साथ पहुंचे साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया। धार्मिक अनुष्ठान के बाद श्रद्धालु डल झील तोड़ने की पारंपरिक रस्म के साक्षी बने।
इस दौरान हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयकारों से डल झील का क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पवित्र झील में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। मणिमहेश यात्रा में दशनामी अखाड़ा की छड़ी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। देशभर से पहुंचे श्रद्धालु इस धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बने। साधु-संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में परंपरागत विधि से पूजा संपन्न होने के बाद डल झील तोड़ने की रस्म निभाई गई।
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