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Chamba News: चौरासी परिसर में भद्रवाह के शिव भक्तों ने डाला डेरा
Sun, 03 Sep 2023 10:54 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 03 Sep 2023 10:54 PM IST
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भरमौर (चंबा)। पवित्र मणिमहेश यात्रा पर आया जम्मू-कश्मीर का जत्था रविवार को चंबा से होकर भरमौर पहुंचा। जैसे ही चौरासी परिसर में इस जत्थे ने प्रवेश किया तो पूरा चौरासी परिसर शिव के जयकारों से गूंज उठा। इससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। चौरासी परिसर में यह जत्था दो दिन तक पड़ाव डालेगा। इसके बाद मणिमहेश के लिए प्रस्थान करेगा।
हर वर्ष यात्रा के दौरान जम्मू के भद्रवाह से आने वाला यह जत्था चौरासी में ठहरता है। इस दौरान एक दिन माता भरमाणी के दर्शन और वहां स्थित कुंड में स्नान करने के चौरासी मंदिर पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद अपने अगले पड़ाव हड़सर के लिए प्रस्थान करेंगे। रविवार और सोमवार को चौरासी परिसर पर देर रात तक भजन-कीर्तन चलता रहेगा।
भद्रवाह से आए श्रद्धालु कुलदीप मिन्हास ने बताया कि वह 25 सालों से मणिमहेश यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान शंकर से आज तक सच्चे मन से उन्होंने जो भी मांगा है, उनकी वह मनोकामना भगवान शंकर ने पूरी की है। इसी तरह पवन कुमार ने बताया कि जैसे ही यात्रा शुरू होने वाली होती है तो उनके शरीर में कंपन सी महसूस होती है।
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ऐसा लगता है कि भगवान शंकर का उनके लिए बुलावा शुरू हो गया है। इसके बाद वह मणिमहेश यात्रा के लिए प्रस्थान शुरू कर देते हैं। यात्रा के दौरान पैदल चलते हुए उन्हें कोई कष्ट महसूस नहीं होता। यात्रा के दौरान वह कब कैलाश पहुंच गए। उन्हें इस बात का भी पता नहीं लगता।
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हर वर्ष यात्रा के दौरान जम्मू के भद्रवाह से आने वाला यह जत्था चौरासी में ठहरता है। इस दौरान एक दिन माता भरमाणी के दर्शन और वहां स्थित कुंड में स्नान करने के चौरासी मंदिर पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद अपने अगले पड़ाव हड़सर के लिए प्रस्थान करेंगे। रविवार और सोमवार को चौरासी परिसर पर देर रात तक भजन-कीर्तन चलता रहेगा।
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भद्रवाह से आए श्रद्धालु कुलदीप मिन्हास ने बताया कि वह 25 सालों से मणिमहेश यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान शंकर से आज तक सच्चे मन से उन्होंने जो भी मांगा है, उनकी वह मनोकामना भगवान शंकर ने पूरी की है। इसी तरह पवन कुमार ने बताया कि जैसे ही यात्रा शुरू होने वाली होती है तो उनके शरीर में कंपन सी महसूस होती है।
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ऐसा लगता है कि भगवान शंकर का उनके लिए बुलावा शुरू हो गया है। इसके बाद वह मणिमहेश यात्रा के लिए प्रस्थान शुरू कर देते हैं। यात्रा के दौरान पैदल चलते हुए उन्हें कोई कष्ट महसूस नहीं होता। यात्रा के दौरान वह कब कैलाश पहुंच गए। उन्हें इस बात का भी पता नहीं लगता।