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Chamba News: सुई-धागे से सपनों में रंग भर रहीं रीना
Mon, 20 Apr 2026 10:40 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 20 Apr 2026 10:40 PM IST
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रीना देवी, महिला उत्थान के साथ
60 महिलाओं को निशुल्क दे रहीं चंबा रुमाल की महीन कढ़ाई का प्रशिक्षण
मैहला में लगाए छोटे स्टॉल से शुरू हुआ सफर, अमृतसर तक पहुंचे उत्पाद
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहला (चंबा)। मैहला की शांत वादियों से उठी एक सुई-धागे की कहानी आज सैकड़ों सपनों को रंग दे रही है।
परंपरा के धागों में उम्मीदों की नई उड़ान पिरोते हुए रीना देवी ने चंबा रुमाल को सिर्फ कला नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का जरिया बना दिया है। उनके हाथों की कढ़ाई अब उन 60 घरों की तकदीर सिल रही है जहां कभी अवसरों की कमी थी। आज वहीं से हुनर, पहचान और कमाई की नई राहें निकल रही हैं।
वर्ष 2008 से वह चंबा रुमाल की कला संजो रही हैं। रीना देवी की ओर से दिया जा रहा निशुल्क प्रशिक्षण महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। वह चंबा रुमाल की महीन कढ़ाई, पारंपरिक डिजाइनों और रंगों के संतुलन की बारीकियां सिखाती हैं। उनके सिखाए हुनर से कई महिलाएं घर बैठे कमाई कर रही हैं।
उन्होंने यह कला स्थानीय कारीगर दिनेश जसरोटिया से सीखी थी। आज वही हुनर वह दूसरों तक पहुंचाकर एक मजबूत शृंखला बना रही हैं। मैहला में लगाए गए छोटे-छोटे स्टॉल से शुरू हुआ यह सफर अब अमृतसर जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच चुका है। उनकी ओर से तैयार चंबा रुमाल अब बाहरी राज्यों में भी पसंद किया जा रहा है। रीना देवी ने इस उपलब्धि का श्रेय पति पवन कुमार को दिया है। उनके सहयोग और विश्वास ने हर मुश्किल को आसान बना दिया। रीना देवी ने कहा कि उनका लक्ष्य केवल कला को बचाना नहीं, बल्कि हर महिला को उसका हक दिलाना है ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके और समाज में अपनी पहचान बना सकें।
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मैहला में लगाए छोटे स्टॉल से शुरू हुआ सफर, अमृतसर तक पहुंचे उत्पाद
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहला (चंबा)। मैहला की शांत वादियों से उठी एक सुई-धागे की कहानी आज सैकड़ों सपनों को रंग दे रही है।
परंपरा के धागों में उम्मीदों की नई उड़ान पिरोते हुए रीना देवी ने चंबा रुमाल को सिर्फ कला नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का जरिया बना दिया है। उनके हाथों की कढ़ाई अब उन 60 घरों की तकदीर सिल रही है जहां कभी अवसरों की कमी थी। आज वहीं से हुनर, पहचान और कमाई की नई राहें निकल रही हैं।
वर्ष 2008 से वह चंबा रुमाल की कला संजो रही हैं। रीना देवी की ओर से दिया जा रहा निशुल्क प्रशिक्षण महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। वह चंबा रुमाल की महीन कढ़ाई, पारंपरिक डिजाइनों और रंगों के संतुलन की बारीकियां सिखाती हैं। उनके सिखाए हुनर से कई महिलाएं घर बैठे कमाई कर रही हैं।
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उन्होंने यह कला स्थानीय कारीगर दिनेश जसरोटिया से सीखी थी। आज वही हुनर वह दूसरों तक पहुंचाकर एक मजबूत शृंखला बना रही हैं। मैहला में लगाए गए छोटे-छोटे स्टॉल से शुरू हुआ यह सफर अब अमृतसर जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच चुका है। उनकी ओर से तैयार चंबा रुमाल अब बाहरी राज्यों में भी पसंद किया जा रहा है। रीना देवी ने इस उपलब्धि का श्रेय पति पवन कुमार को दिया है। उनके सहयोग और विश्वास ने हर मुश्किल को आसान बना दिया। रीना देवी ने कहा कि उनका लक्ष्य केवल कला को बचाना नहीं, बल्कि हर महिला को उसका हक दिलाना है ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके और समाज में अपनी पहचान बना सकें।
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रीना देवी, महिला उत्थान के साथ