{"_id":"65d62cf5aa9c28d2e20b3937","slug":"rath-yatra-reached-purthi-from-rei-and-shaur-chamba-news-c-88-1-ssml1004-118993-2024-02-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: रेई और शौर से से पुर्थी पहुंची रथ यात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: रेई और शौर से से पुर्थी पहुंची रथ यात्रा
Wed, 21 Feb 2024 10:33 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 21 Feb 2024 10:33 PM IST
विज्ञापन
चंबा के पांगी में जुकारू उत्सव में पूजा अर्चना के दौरान लोग।संवाद
पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी में भारी बर्फबारी के बीच भी पांगीवासियों का जुकारू उत्सव को लेकर जोश कम नहीं हुआ है।
उत्सव के 12वें दिन चार प्रजामंडलों ने बाहरालू मेले का आयोजन किया। यह मेला पुर्थी पंचायत में मनाया जाता है। इसमें रेई, पुर्थी, शौर और थांदल की प्रजामंडल भाग लेते हैं। लोगों ने मिलकर पुर्थी में बाहरालू मेला मनाया। इन प्रजामंडलों के लोग 12 दिन बाद एक-दूसरे के साथ मिलकर खुश हुए। मान्यता है कि इन चार गांवों के लोग 12 दिन तक एक दूसरे के गांव में नहीं जाते हैं। 12 दिन बाद बारहालू मेले के दिन सभी के साथ मिलते हैं। जुकारू पर्व पर एक-दूसरे के गले मिलते हैं। चारों प्रजामंडलों के लोग ढोल-नगाड़ों के साथ यहां पहुंचते हैं। इस दौरान रेई और शौर से रथ यात्रा भी निकाली जाती है, जो पुर्थी पहुंचती है। रथ यात्रा के साथ जहां माता के गूर शामिल रहते हैं तो वहीं भारी संख्या में स्थानीय लोग भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाते हैं। बुधवार को 6:00 बजे मलासनी माता मंदिर पुर्थी में थांदल और पुर्थी के लोग लकड़ी से बनी कुकड़ी (माता का खिलौना) की सजावट करने में जुट गए। सुबह 9:00 बजे उन्होंने कुकड़ी को आभूषण पहनाकर रथ यात्रा के लिए तैयार कर दिया। घर की छत पर मेला मनाया जाता है। वहां 24 घंटे दीया जलाकर बलिदानी राजा की पूजा की जाती है। मलासनी माता मंदिर के पुजारी भूरी सिंह ने बताया कि मेले के खत्म होने के अगले दिन यानी वीरवार को सुबह माता के खिलौने कुकड़ी को मेले स्थल से वापस लाया जाएगा।
विज्ञापन
उत्सव के 12वें दिन चार प्रजामंडलों ने बाहरालू मेले का आयोजन किया। यह मेला पुर्थी पंचायत में मनाया जाता है। इसमें रेई, पुर्थी, शौर और थांदल की प्रजामंडल भाग लेते हैं। लोगों ने मिलकर पुर्थी में बाहरालू मेला मनाया। इन प्रजामंडलों के लोग 12 दिन बाद एक-दूसरे के साथ मिलकर खुश हुए। मान्यता है कि इन चार गांवों के लोग 12 दिन तक एक दूसरे के गांव में नहीं जाते हैं। 12 दिन बाद बारहालू मेले के दिन सभी के साथ मिलते हैं। जुकारू पर्व पर एक-दूसरे के गले मिलते हैं। चारों प्रजामंडलों के लोग ढोल-नगाड़ों के साथ यहां पहुंचते हैं। इस दौरान रेई और शौर से रथ यात्रा भी निकाली जाती है, जो पुर्थी पहुंचती है। रथ यात्रा के साथ जहां माता के गूर शामिल रहते हैं तो वहीं भारी संख्या में स्थानीय लोग भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाते हैं। बुधवार को 6:00 बजे मलासनी माता मंदिर पुर्थी में थांदल और पुर्थी के लोग लकड़ी से बनी कुकड़ी (माता का खिलौना) की सजावट करने में जुट गए। सुबह 9:00 बजे उन्होंने कुकड़ी को आभूषण पहनाकर रथ यात्रा के लिए तैयार कर दिया। घर की छत पर मेला मनाया जाता है। वहां 24 घंटे दीया जलाकर बलिदानी राजा की पूजा की जाती है। मलासनी माता मंदिर के पुजारी भूरी सिंह ने बताया कि मेले के खत्म होने के अगले दिन यानी वीरवार को सुबह माता के खिलौने कुकड़ी को मेले स्थल से वापस लाया जाएगा।