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जिला मुख्यालय में महंगाई पर गरजी सीटू
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चंबा में प्रदर्शन करते सीटू के पदाधिकारी।
- फोटो : Chamba
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चंबा। जिला मुख्यालय में सीटू कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अगुवाई सीटू जिला अध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बढ़ती महंगाई पर रोष प्रकट किया। धरने को संबोधित करते हुए नरेंद्र ने कहा कि पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है और इस विकट परिस्थिति में केंद्र सरकार जनता को लूटने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से देश आर्थिक मंदी की चपेट में है, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है।
ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार को जनता की सहायता के लिए आगे आने चाहिए था लेकिन सरकार देशी और विदेशी पूंजीपतियों के मुनाफे को बढ़ाने का काम कर रही है। केंद्र सरकार की इन्हीं नीतियों के चलते पूंजीपतियों का लाभ हुआ और जनता को नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि 44 श्रम कानूनों को बदलकर केंद्र सरकार ने यह साबित कर दिया है कि यह सरकार मजदूरों की कितनी विरोधी है। कहा कि चोरी श्रम कानूनों को बदलकर चार कोड बना दिए गए हैं।
ये सभी श्रम कानून मजदूरों ने सौ साल के संघर्ष के बाद हासिल किए थे। ये कानून शोषण और लूट को रोकने की एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। पूंजीपतियों के साथ उनकी सौदेबाजी की ताकत मजबूत करने का एक माध्यम थे। लेकिन, अब इनको बदलकर चार कोड बनने से मजदूरों की ताकत कम हो गई है। उन्होंने बताया कि आज के समय में रसोई गैस की कीमत 900 रुपये से ज्यादा और पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। खाद्य तेल और दालों की कीमतें आसमान छू रही हैं। डिपुओें में भी राशन महंगा हो रहा है। सीटू कार्यकर्ताओं ने सरकार को चेताया है कि अगर जल्द लेबर कोड और कृषि कानून को निरस्त नहीं करती है तो आने वाले समय में पूरे देश में आंदोलन होगा। इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। इस अवसर पर नरेंद्र, विपिन, केवल कृष्ण, रिझु राम, संजीव, प्रेम, राशि शर्मा, किशन, राजकुमार, नरेंद्र जरयाल इत्यादि मौजूद रहे।
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ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार को जनता की सहायता के लिए आगे आने चाहिए था लेकिन सरकार देशी और विदेशी पूंजीपतियों के मुनाफे को बढ़ाने का काम कर रही है। केंद्र सरकार की इन्हीं नीतियों के चलते पूंजीपतियों का लाभ हुआ और जनता को नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि 44 श्रम कानूनों को बदलकर केंद्र सरकार ने यह साबित कर दिया है कि यह सरकार मजदूरों की कितनी विरोधी है। कहा कि चोरी श्रम कानूनों को बदलकर चार कोड बना दिए गए हैं।
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ये सभी श्रम कानून मजदूरों ने सौ साल के संघर्ष के बाद हासिल किए थे। ये कानून शोषण और लूट को रोकने की एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। पूंजीपतियों के साथ उनकी सौदेबाजी की ताकत मजबूत करने का एक माध्यम थे। लेकिन, अब इनको बदलकर चार कोड बनने से मजदूरों की ताकत कम हो गई है। उन्होंने बताया कि आज के समय में रसोई गैस की कीमत 900 रुपये से ज्यादा और पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। खाद्य तेल और दालों की कीमतें आसमान छू रही हैं। डिपुओें में भी राशन महंगा हो रहा है। सीटू कार्यकर्ताओं ने सरकार को चेताया है कि अगर जल्द लेबर कोड और कृषि कानून को निरस्त नहीं करती है तो आने वाले समय में पूरे देश में आंदोलन होगा। इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। इस अवसर पर नरेंद्र, विपिन, केवल कृष्ण, रिझु राम, संजीव, प्रेम, राशि शर्मा, किशन, राजकुमार, नरेंद्र जरयाल इत्यादि मौजूद रहे।
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