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चंबा में निजी अस्पतालों में ईलाज के नाम पर लूटे जा रहे हैं मरीज
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चंबा। जिले में निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों को खूब लूटा जा रहा है। उपचार में होने वाले टेस्ट के मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। हालात यह हैं कि टेस्ट करने पर मरीजों को उसकी रशीद तक नहीं दी जा रही। मरीजों को टेस्ट की रशीद इसलिए भी नहीं दी जा रही, जिससे मरीज उनकी कालाबजारी को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समक्ष ला सके। जो टेस्ट निजी प्रयोगशाला में सात से आठ सौ रुपये में होते हैं वही, टेस्ट निजी अस्पतालों में तीन से चार हजार रुपये में किए जा रहे हैं। तीमारदार अपने मरीज की जान बचाने के चक्कर में निजी अस्पतालों में लुटने के लिए मजबूर हैं। लेकिन, हैरानी की बात है कि निजी अस्पतालों में चल रहे इस गोरखधंधे को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
मरीजों की पर्ची बनवाने से लेकर दवाई तक उन्हें खूब लूटा जाता है। यहां तक कि टेस्ट को लेकर निजी अस्पतालों में कोई सूची तक नहीं लगाई है। इसके चलते मरीजों से टेस्ट के बदले में मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। गौरतलब है कि कुछेक चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में नौकरी छोड़कर निजी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की मनमानी पर प्रबंधन कुछ हद तक शिकंजा कस देता है लेकिन, निजी अस्पतालों में चल रही मनमानी को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
निजी अस्पतालों में कोविड नियमों की भी पूरी तरह से पालना नहीं की जा रही है। जिला मुख्यालय के साथ लगते इलाकों में कई निजी अस्पताल और क्लीनिक हैं, जहां मरीजों से टेस्ट के मनमाने दाम वसूल किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों से टेस्ट के वसूले जा रहे मनमाने दामों की चेकिंग की जाए। साथ ही मनमानी करने वाले अस्पताल संचालकों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
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एडीसी मुकेश रेपस्वाल ने बताया कि निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में मरीजों के टेस्ट को लेकर रेट निर्धारित किए गए हैं। निर्धारित रेट से ज्यादा दाम वसूलने वाले निजी क्लीनिक और निजी अस्पताल संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी।
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मरीजों की पर्ची बनवाने से लेकर दवाई तक उन्हें खूब लूटा जाता है। यहां तक कि टेस्ट को लेकर निजी अस्पतालों में कोई सूची तक नहीं लगाई है। इसके चलते मरीजों से टेस्ट के बदले में मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। गौरतलब है कि कुछेक चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में नौकरी छोड़कर निजी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की मनमानी पर प्रबंधन कुछ हद तक शिकंजा कस देता है लेकिन, निजी अस्पतालों में चल रही मनमानी को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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निजी अस्पतालों में कोविड नियमों की भी पूरी तरह से पालना नहीं की जा रही है। जिला मुख्यालय के साथ लगते इलाकों में कई निजी अस्पताल और क्लीनिक हैं, जहां मरीजों से टेस्ट के मनमाने दाम वसूल किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों से टेस्ट के वसूले जा रहे मनमाने दामों की चेकिंग की जाए। साथ ही मनमानी करने वाले अस्पताल संचालकों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
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एडीसी मुकेश रेपस्वाल ने बताया कि निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में मरीजों के टेस्ट को लेकर रेट निर्धारित किए गए हैं। निर्धारित रेट से ज्यादा दाम वसूलने वाले निजी क्लीनिक और निजी अस्पताल संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी।