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Chamba News: अचार को बनाया रोजगार का जरिया, महिलाओं को भी जोड़ा
Wed, 24 Jul 2024 10:09 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 24 Jul 2024 10:09 PM IST
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बनाऐ गये उत्पादो के साथ शंकुतला।संवाद
चंबा। कहते हैं कि कुछ करने का जज्बा और हौसले बुलंद हों तो कामयाबी मिल ही जाती है। फिर चाहे रास्ते में कितनी भी रुकावटें क्यों न आएं, इंसान मंजिल पा ही लेता है। चंबा शहर की शकुंतला भी इसी जज्बे के साथ उत्पाद तैयार कर इन्हें बेचती हैं।
कहती हैं कि उनके हाथों से तैयार किए गए अचार, खिलौने और अन्य उत्पादों की स्थानीय बाजार में भी काफी मांग है। वह टेडी बियर बनाती हैं। इसके अलावा करेला, नींबू, आम, अदरक और लहसुन सहित विभिन्न प्रकार के अचार तैयार करती हैं। इन्हें बेचकर होने वाली आमदनी से घर का खर्च चलाती हैं। उन्होंने 10 अन्य महिलाओं को अपने साथ जोड़ा है। हर महीने 25 हजार रुपये की कमाई करती हैं। शकुंतला कहती हैं कि उनके पति की मृत्यु के बाद परिवार के पालन-पोषण का जिम्मा उनके कंधों पर आ गया था। उन्होंने हार नहीं मानी और शहरी राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ऋण लिया। इसके बाद स्वरोजगार शुरू किया। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से तैयार किया गया अचार लोगों को खूब पसंद आता है। इसकी दिल्ली तक मांग है। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में खुद के बनाए उत्पादों के स्टॉल लगाती हैं। पिछले वर्ष मिंजर मेले में लगभग 50 हजार रुपये की कमाई की थी। कहा कि हर साल मिंजर मेले में अचार की अच्छी-खासी बिक्री होती है। अब तक वह मांग पर अचार दिल्ली, चंडीगढ़ और शिमला तक भेज चुकी हैं। विभिन्न प्रकार के तैयार करने की मांग आती है। उन्होंने कई महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूह के साथ जोड़कर रोजगार दिया है।
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कहती हैं कि उनके हाथों से तैयार किए गए अचार, खिलौने और अन्य उत्पादों की स्थानीय बाजार में भी काफी मांग है। वह टेडी बियर बनाती हैं। इसके अलावा करेला, नींबू, आम, अदरक और लहसुन सहित विभिन्न प्रकार के अचार तैयार करती हैं। इन्हें बेचकर होने वाली आमदनी से घर का खर्च चलाती हैं। उन्होंने 10 अन्य महिलाओं को अपने साथ जोड़ा है। हर महीने 25 हजार रुपये की कमाई करती हैं। शकुंतला कहती हैं कि उनके पति की मृत्यु के बाद परिवार के पालन-पोषण का जिम्मा उनके कंधों पर आ गया था। उन्होंने हार नहीं मानी और शहरी राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ऋण लिया। इसके बाद स्वरोजगार शुरू किया। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से तैयार किया गया अचार लोगों को खूब पसंद आता है। इसकी दिल्ली तक मांग है। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में खुद के बनाए उत्पादों के स्टॉल लगाती हैं। पिछले वर्ष मिंजर मेले में लगभग 50 हजार रुपये की कमाई की थी। कहा कि हर साल मिंजर मेले में अचार की अच्छी-खासी बिक्री होती है। अब तक वह मांग पर अचार दिल्ली, चंडीगढ़ और शिमला तक भेज चुकी हैं। विभिन्न प्रकार के तैयार करने की मांग आती है। उन्होंने कई महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूह के साथ जोड़कर रोजगार दिया है।
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