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डॉक्टर के ओपीडी छोड़ने पर भड़के मरीज
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मेडिकल कॉलेज चंबा के शिशु रोग ओपीडी के बाहर बच्चों संग बैठकर डॉक्टर का इंतजार करते परिजन।संवाद
- फोटो : Chamba
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चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में विशेषज्ञों की कमी मरीजों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। बुधवार को बाल रोग ओपीडी के बाहर उस समय तीमारदार भड़क गए जब ओपीडी से विशेषज्ञ अचानक उठकर एमबीबीएस प्रशिक्षुओं को पढ़ाने के लिए चले गए। तीमारदार गोद में बीमार बच्चों को उठाकर ओपीडी के बाहर हंगामा करने लगे। इस दौरान सुरक्षा निजी कर्मचारी के साथ बहसबाजी भी हो गई। उसने तीमारदारों को प्रबंधन के पास अपनी शिकायत करने का परामर्श दिया। कुछ महिलाएं अपने बीमार बच्चों को गोद में उठाकर फर्श पर ही बैठ गईं।
इसके अलावा कई तीमारदार कतारों में खड़े होकर विशेषज्ञ के लौटने का इंतजार करते रहे। करीब एक घंटे के बाद विशेषज्ञ ओपीडी में पहुंचा। उसके बाद बीमार बच्चों का इलाज शुरू हो पाया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। अक्सर देखने में आया है कि महिला और बाल रोग ओपीडी में मरीजों को कई बार विशेषज्ञ नहीं मिलते हैं। इसका मुख्य कारण विशेषज्ञों की कमी है। आपातकाल में विशेषज्ञ को ओपीडी छोड़ जाना पड़ता है।
ओपीडी में सुबह 9:30 बजे से लोग अपने बीमार बच्चों को लेकर खड़े थे लेकिन बच्चों के उपचार के लिए वहां कोई विशेषज्ञ नहीं मौजूद था। - बलविंदर, तीमारदार।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर समय विशेषज्ञ होना चाहिए लेकिन अस्पताल में किसी भी समय विशेषज्ञ ओपीडी से गायब हो जाता है। इनु, तीमारदार।
सुबह 9:00 बजे अपने वह बीमार बच्चे को लेकर विशेषज्ञ से जांच करवाने पहुंची थी। 11:15 बजे अचानक विशेषज्ञ ओपीडी से चले गए। इसकी वजह से उन्हें बच्चे का इलाज करवाने में काफी परेशानी हुई। नीता, तीमारदार।
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सरकार ने कहने के लिए चंबा में मेडिकल कॉलेज खोल दिया है लेकिन यहां मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। मरीजों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। -सोनिया, तीमारदार।
विशेषज्ञों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है। उम्मीद है कि सरकार जल्द चंबा में अतिरिक्त विशेषज्ञों की नियुक्तियां कर सकती है। ओपीडी में बैठने वाले डॉक्टरों को प्रशिक्षुओं की कक्षाएं भी लगानी पड़ रही हैं।
देवेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज चंबा।
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इसके अलावा कई तीमारदार कतारों में खड़े होकर विशेषज्ञ के लौटने का इंतजार करते रहे। करीब एक घंटे के बाद विशेषज्ञ ओपीडी में पहुंचा। उसके बाद बीमार बच्चों का इलाज शुरू हो पाया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। अक्सर देखने में आया है कि महिला और बाल रोग ओपीडी में मरीजों को कई बार विशेषज्ञ नहीं मिलते हैं। इसका मुख्य कारण विशेषज्ञों की कमी है। आपातकाल में विशेषज्ञ को ओपीडी छोड़ जाना पड़ता है।
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ओपीडी में सुबह 9:30 बजे से लोग अपने बीमार बच्चों को लेकर खड़े थे लेकिन बच्चों के उपचार के लिए वहां कोई विशेषज्ञ नहीं मौजूद था। - बलविंदर, तीमारदार।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर समय विशेषज्ञ होना चाहिए लेकिन अस्पताल में किसी भी समय विशेषज्ञ ओपीडी से गायब हो जाता है। इनु, तीमारदार।
सुबह 9:00 बजे अपने वह बीमार बच्चे को लेकर विशेषज्ञ से जांच करवाने पहुंची थी। 11:15 बजे अचानक विशेषज्ञ ओपीडी से चले गए। इसकी वजह से उन्हें बच्चे का इलाज करवाने में काफी परेशानी हुई। नीता, तीमारदार।
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सरकार ने कहने के लिए चंबा में मेडिकल कॉलेज खोल दिया है लेकिन यहां मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। मरीजों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। -सोनिया, तीमारदार।
विशेषज्ञों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है। उम्मीद है कि सरकार जल्द चंबा में अतिरिक्त विशेषज्ञों की नियुक्तियां कर सकती है। ओपीडी में बैठने वाले डॉक्टरों को प्रशिक्षुओं की कक्षाएं भी लगानी पड़ रही हैं।
देवेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज चंबा।