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Chamba News: पांगी में अब बर्फबारी में भी गुल नहीं होगी बिजली
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चंबा। जनजातीय क्षेत्र पांगी की 19 पंचायतों में अब सर्दियों में भी बिजली गुल होने की समस्या नहीं सताएगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने पांगी घाटी के लिए अपने बजट में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने का प्रावधान किया है। पांगी घाटी में पन विद्युत परियोजनाओं के साथ ही अब बैटरी की उर्जा से बिजली तैयार की जाएगी। इससे सर्दियों में पांगी की 19 पंचायतों में रहने वाली 30,000 की आबादी को अंधेरे से निजात मिलेगी। क्योंकि पांगी घाटी में सर्दियों में भारी मात्रा में बर्फबारी होती है।
ऐसे में पांगी के नदी-नालों का पानी भी जम जाता है। इसकी वजह से पावर हाउस में बिजली का उत्पादन नहीं हो पाता। इससे पांगी की अधिकतर पंचायतों में बिजली की समस्या रहती है। हालांकि पिछली सरकार ने पांगी में बीपीएल परिवारों को सर्दियों में बिजली की रोशनी करने के लिए सोलर प्लांट दिए थे लेकिन अब प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने पांगी घाटी में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने का फैसला लिया है जो पांगीवासियों के लिए काफी लाभदायिक साबित होगी। पांगी घाटी में मौजूदा समय में चार पावर हाउस हैं लेकिन सर्दियों में जब नदी-नालों का पानी जम जाता है तो इन पावर हाउसों में लोगों की जरूरत के अनुसार बिजली का उत्पादन नहीं होता। इसके चलते लोगों को नियमित रूप से बिजली आपूर्ति भी नहीं हो पाती। ऐसे में सरकार की बैटरी एनर्जी स्टोरेज योजना पांगी वासियों के लिए संजीवनी का कार्य करेगी। अब घाटी के लोग जल्द इसको स्थापित करवाने की मांग सरकार से कर रहे हैं। पांगी वासियों ने मुख्यमंत्री सुक्खविंद्र सिंह सुक्खू का आभार भी प्रकट किया है।
हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बैटरी हर जगह एक बेहद जरूरी वस्तु बन चुकी है। खिलौने से लेकर कार तक, सामान्य वस्तुओं को ऊर्जा प्रदान करने के लिए बैटरियों की जरूरत होती है। लार्ज स्केल बैटरी की भूमिका और भी बढ़ जाती है क्योंकि इसका उपयोग रिन्यूअल एनर्जी यानी अक्षय ऊर्जा स्रोतों को बिजली प्रदान करने के लिए होता है। इससे भारत और अन्य देशों को फॉसिल फ्यूल यानी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है।
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बैटरी स्टोरेज एक ऐसी तकनीक है, जिसका उपयोग ऊर्जा को स्टोर करने और इसकी आवश्यकता होने पर और सही मात्रा में उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाने के लिए किया जाता है। आजकल इंजीनियर लार्ज स्केल बैटरी पर काम कर रहे हैं, जिन्हें सौर या पवन जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा को स्टोर करने के लिए पावर ग्रिड में एकीकृत किया जा सकता है।
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ऐसे में पांगी के नदी-नालों का पानी भी जम जाता है। इसकी वजह से पावर हाउस में बिजली का उत्पादन नहीं हो पाता। इससे पांगी की अधिकतर पंचायतों में बिजली की समस्या रहती है। हालांकि पिछली सरकार ने पांगी में बीपीएल परिवारों को सर्दियों में बिजली की रोशनी करने के लिए सोलर प्लांट दिए थे लेकिन अब प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने पांगी घाटी में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने का फैसला लिया है जो पांगीवासियों के लिए काफी लाभदायिक साबित होगी। पांगी घाटी में मौजूदा समय में चार पावर हाउस हैं लेकिन सर्दियों में जब नदी-नालों का पानी जम जाता है तो इन पावर हाउसों में लोगों की जरूरत के अनुसार बिजली का उत्पादन नहीं होता। इसके चलते लोगों को नियमित रूप से बिजली आपूर्ति भी नहीं हो पाती। ऐसे में सरकार की बैटरी एनर्जी स्टोरेज योजना पांगी वासियों के लिए संजीवनी का कार्य करेगी। अब घाटी के लोग जल्द इसको स्थापित करवाने की मांग सरकार से कर रहे हैं। पांगी वासियों ने मुख्यमंत्री सुक्खविंद्र सिंह सुक्खू का आभार भी प्रकट किया है।
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हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बैटरी हर जगह एक बेहद जरूरी वस्तु बन चुकी है। खिलौने से लेकर कार तक, सामान्य वस्तुओं को ऊर्जा प्रदान करने के लिए बैटरियों की जरूरत होती है। लार्ज स्केल बैटरी की भूमिका और भी बढ़ जाती है क्योंकि इसका उपयोग रिन्यूअल एनर्जी यानी अक्षय ऊर्जा स्रोतों को बिजली प्रदान करने के लिए होता है। इससे भारत और अन्य देशों को फॉसिल फ्यूल यानी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है।
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बैटरी स्टोरेज एक ऐसी तकनीक है, जिसका उपयोग ऊर्जा को स्टोर करने और इसकी आवश्यकता होने पर और सही मात्रा में उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाने के लिए किया जाता है। आजकल इंजीनियर लार्ज स्केल बैटरी पर काम कर रहे हैं, जिन्हें सौर या पवन जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा को स्टोर करने के लिए पावर ग्रिड में एकीकृत किया जा सकता है।