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Chamba News: दर्द की घड़ी में नहीं मिल रही राहत की दवा
Thu, 17 Sep 2026 10:22 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 17 Sep 2026 10:22 PM IST
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मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन कक्ष में बाहर से खरीद कर लाया ट्रामाडोल इंजेक्शन। संवाद।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ट्रामाडोल इंजेक्शन खत्म, मरीजों के तीमारदार बाहर से खरीदने के लिए मजबूर
40 रुपये का इंजेक्शन लेने के लिए रात में भी वार्ड से बाहर जाने की परेशानी, ईसीजी की सुविधा पर भी उठ रहे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को जरूरी दवा और जांच के लिए भी इमरजेंसी से बाहर जाना पड़ रहा है।
वार्ड में ट्रामाडोल इंजेक्शन की आपूर्ति खत्म होने के कारण तेज दर्द से परेशान मरीजों के तीमारदारों को करीब 40 रुपये का इंजेक्शन बाहर से खरीदकर लाना पड़ रहा है। आपात स्थिति में दवा के लिए मरीज के साथ आए व्यक्ति को वार्ड से बाहर जाना पड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
तीमारदार जय सिंह, राज कुमार, शम्मी कुमार, करण महाजन, अजय कुमार, महिंद्र सिंह और केवल ने बताया कि इमरजेंसी में पहुंचने के बाद भी दर्द निवारक इंजेक्शन के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि खासकर तेज दर्द से परेशान मरीज के लिए दवा की व्यवस्था करने में लगने वाला अतिरिक्त समय परेशानी बढ़ाता है। इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक दवाएं वहीं उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि मरीज को उपचार के बीच दवा के लिए इंतजार न करना पड़े और तीमारदार को उसे छोड़कर बाहर न जाना पड़े।
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ईसीजी के लिए भी बाहर का रास्ता
इमरजेंसी में छाती और हृदय संबंधी दर्द की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों को ईसीजी करवाने के लिए वार्ड से बाहर बने ईसीजी कक्ष तक जाना पड़ रहा है। खास बात यह है कि मरीजों के बिस्तरों के साथ लगे मॉनिटर में ईसीजी करने की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन अधिकतर मॉनिटर खस्ताहाल बताए जा रहे हैं। इसके चलते मरीजों को वार्ड से बाहर ले जाकर ईसीजी करवाना पड़ रहा है। छाती या हृदय संबंधी दर्द से परेशान मरीजों को अनावश्यक रूप से पैदल चलने से बचाना जरूरी होता है। ऐसे में जांच के लिए इमरजेंसी से बाहर आवाजाही की व्यवस्था मरीजों की सुविधा और सुरक्षा के लिहाज से सवाल खड़े करती है।
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आपात कक्ष में ही मिलनी चाहिए जरूरी सुविधा
तीमारदारों का कहना है कि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की प्राथमिक जांच, आवश्यक दवाएं और जरूरी सुविधाएं उसी वार्ड में उपलब्ध होनी चाहिए। मरीज को उपचार के दौरान अलग-अलग जगह भेजने से परेशानी बढ़ती है। खासकर गंभीर दर्द या छाती संबंधी समस्या वाले मरीजों के लिए यह व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
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मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि कुछ दिन पहले भी लाखों रुपये की दवाएं मेडिकल कॉलेज पहुंची हैं। खत्म हुआ ट्रामाडोल इंजेक्शन शीघ्र इमरजेंसी वार्ड में उपलब्ध करवाया जाएगा।
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40 रुपये का इंजेक्शन लेने के लिए रात में भी वार्ड से बाहर जाने की परेशानी, ईसीजी की सुविधा पर भी उठ रहे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को जरूरी दवा और जांच के लिए भी इमरजेंसी से बाहर जाना पड़ रहा है।
वार्ड में ट्रामाडोल इंजेक्शन की आपूर्ति खत्म होने के कारण तेज दर्द से परेशान मरीजों के तीमारदारों को करीब 40 रुपये का इंजेक्शन बाहर से खरीदकर लाना पड़ रहा है। आपात स्थिति में दवा के लिए मरीज के साथ आए व्यक्ति को वार्ड से बाहर जाना पड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
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तीमारदार जय सिंह, राज कुमार, शम्मी कुमार, करण महाजन, अजय कुमार, महिंद्र सिंह और केवल ने बताया कि इमरजेंसी में पहुंचने के बाद भी दर्द निवारक इंजेक्शन के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि खासकर तेज दर्द से परेशान मरीज के लिए दवा की व्यवस्था करने में लगने वाला अतिरिक्त समय परेशानी बढ़ाता है। इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक दवाएं वहीं उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि मरीज को उपचार के बीच दवा के लिए इंतजार न करना पड़े और तीमारदार को उसे छोड़कर बाहर न जाना पड़े।
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ईसीजी के लिए भी बाहर का रास्ता
इमरजेंसी में छाती और हृदय संबंधी दर्द की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों को ईसीजी करवाने के लिए वार्ड से बाहर बने ईसीजी कक्ष तक जाना पड़ रहा है। खास बात यह है कि मरीजों के बिस्तरों के साथ लगे मॉनिटर में ईसीजी करने की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन अधिकतर मॉनिटर खस्ताहाल बताए जा रहे हैं। इसके चलते मरीजों को वार्ड से बाहर ले जाकर ईसीजी करवाना पड़ रहा है। छाती या हृदय संबंधी दर्द से परेशान मरीजों को अनावश्यक रूप से पैदल चलने से बचाना जरूरी होता है। ऐसे में जांच के लिए इमरजेंसी से बाहर आवाजाही की व्यवस्था मरीजों की सुविधा और सुरक्षा के लिहाज से सवाल खड़े करती है।
आपात कक्ष में ही मिलनी चाहिए जरूरी सुविधा
तीमारदारों का कहना है कि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की प्राथमिक जांच, आवश्यक दवाएं और जरूरी सुविधाएं उसी वार्ड में उपलब्ध होनी चाहिए। मरीज को उपचार के दौरान अलग-अलग जगह भेजने से परेशानी बढ़ती है। खासकर गंभीर दर्द या छाती संबंधी समस्या वाले मरीजों के लिए यह व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि कुछ दिन पहले भी लाखों रुपये की दवाएं मेडिकल कॉलेज पहुंची हैं। खत्म हुआ ट्रामाडोल इंजेक्शन शीघ्र इमरजेंसी वार्ड में उपलब्ध करवाया जाएगा।