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चुराह के इतिहास में नए चेहरे ने नहीं देखी कभी हार

Mon, 07 Nov 2022 10:30 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Nov 2022 10:30 PM IST
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New face never seen defeat in the history of Churah
तीसा (चंबा)। चुराह विधानसभा क्षेत्र की हॉट सीट पर चुनाव इस बार रोचक होने वाला है। चुनावी इतिहास में अगर नजर दौड़ाई जाए तो यहां से नए चेहरे ने अभी तक हार का मुंह नहीं देखा है और न ही किसी भी राजनीतिक दल का प्रत्याशी यहां से जीत की हैट्रिक लगा पाया है।
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इस बार कांग्रेस ने नए प्रत्याशी यशवंत सिंह खन्ना को चुनावी रण में उतारकर भाजपा प्रत्याशी हंसराज की जीत की हैट्रिक का सपना तोड़ने के लिए ट्रंप कार्ड खेला है। कांग्रेस ने नए प्रत्याशी को उतारकर भाजपा के क्षेत्रवाद और चुराहवाद के मुद्दे का भी तोड़ निकाला है। ऐसे में पिछले दो चुनाव में हलके से जीत दर्ज करने वाली भाजपा को भी खसी जद्दोजहद करनी पड़ेगी। विधानसभा क्षेत्र चुराह से वर्ष 1977 में भाजपा ने यहां मोहनलाल को नए चेहरे के तौर पर उतारा।
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मोहन लाल ने लगातार 1977 और 1982 का चुनाव जीतकर विधानसभा में चुराह का प्रतिनिधित्व किया। दो बार लगातार हार से परेशान कांग्रेस ने वर्ष 1985 में विद्याधर का टिकट काटकर नंद कुमार चौहान को चुनावी रण में उतारा। कांग्रेस पार्टी का पैंतरा काम कर गया और नंद कुमार ने जीत दर्ज कर मोहन लाल की हैट्रिक के सपने को तोड़ दिया। वर्ष 2003 में कांग्रेस ने एक बार फिर नए चेहरे पर दावं खेलते हुए विद्याधर के बेटे सुरेंद्र भारद्वाज को चुनाव समर में उतार दिया। सुरेंद्र भारद्वाज ने भी लगातार 2007-2012 में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2012 के चुनावों में भाजपा ने मोहन लाल का टिकट काटकर चुराह के हंसराज को चुनावी मैदान में उतारा। हंसराज ने भी सुरेंद्र कुमार की जीत की हैट्रिक के सपने को तोड़ दिया और वर्ष 2012 से 2017 तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
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कार्यकाल के दौरान उन्हें विस उपाध्यक्ष का ओहदा भी मिला है। ऐसे में अब कांग्रेस ने नया पैंतरा खेलते हुए क्षेत्र से हर बार उठने वाले चुराहवाद के मुद्दे का तोड़ निकालते हुए पूर्व विधायक सुरेंद्र भारद्वाज का टिकट काटकर शिक्षक की नौकरी छोड़ने वाले यशवंत खन्ना को चुनावी मैदान में उतारा है। यशवंत सिंह खन्ना के मैदान में उतरने से चुनाव मेें क्षेत्रवाद और चुराहवाद का मुद्दा ही खत्म हो गया। ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प रहेगा कि क्या कांग्रेस का ट्रंप कार्ड चल निकलता है या भाजपा प्रत्याशी अपनी हैट्रिक लगाने में कामयाब रहता है।
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