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Chamba News: बंदरों के आतंक और समय पर बारिश न होने से कम बिका मक्की का बीज
Sun, 30 Jun 2024 09:32 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 30 Jun 2024 09:32 PM IST
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चंबा। जिले में इस बार मक्की के बीज की बिक्री का आंकड़ा कम हो गया है। अब तक मात्र करीब 1100 क्विंटल बीज ही बिक पाया है, जबकि अधिकतर किसान मक्की की बिजाई भी कर चुके हैं।
कृषि विभाग ने इस बार 1250 क्विंटल मक्की के बीज की मांग की थी। इसमें अभी भी 150 क्विंटल बीज विभाग के वितरण केंद्रों में उपलब्ध है। जिले में मक्की के बीज की कम बिक्री होने का कारण प्रारंभिक तौर पर समय पर बारिश न होना बताया जा रहा है। साथ की कुछ गांवों में बंदरों के उत्पात के चलते भी किसानों ने मक्की की बिजाई कम की है। इसी वजह से इस बार बीज बच गया है। हालांकि, यह बीज अभी विभाग के वितरण केंद्रों में बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा।
माना जा रहा है कि इस बार पहले की अपेक्षा काफी कम किसानों ने मक्की की बिजाई करने में दिलचस्पी दिखाई। मक्की के बीज की बिक्री कम होने का फिलहाल यही कारण माना जा रहा है। इससे पहले 1500 से लेकर 1800 क्विंटल मक्की के बीच हर वर्ष खपत रहती थी। इस बार मक्की के बीज की बिक्री की आंकड़ा 1100 क्विंटल तक ही पहुंच पाया है। विभाग पहली मांग के बाद दो से तीन बार मक्की का बीज मंगवाता रहा है। इस बार एक बार आया बीज की विक्रय करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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गौरतलब है कि एक तरफ जिले के किसान मक्की की खेती करते हैं, दूसरी तरफ अब बाजार और चरी उगाने को लेकर उनका रुझान बढ़ा है। किसानों की मानें तो बंदरों के उत्पात के चलते मक्की की फसल ज्यादा प्रभावित होती है। ऐसे में उनका मक्की के प्रति रुझान कम हुआ है। उधर, कृषि विभाग चंबा के उपनिदेशक डॉ. कुलदीप धीमान ने कहा कि इस बार अब तक 1100 क्विंटल तक मक्की का बीज बिका है। अभी भी करीब 150 क्विंटल बीज विभाग के पास उपलब्ध है।
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कृषि विभाग ने इस बार 1250 क्विंटल मक्की के बीज की मांग की थी। इसमें अभी भी 150 क्विंटल बीज विभाग के वितरण केंद्रों में उपलब्ध है। जिले में मक्की के बीज की कम बिक्री होने का कारण प्रारंभिक तौर पर समय पर बारिश न होना बताया जा रहा है। साथ की कुछ गांवों में बंदरों के उत्पात के चलते भी किसानों ने मक्की की बिजाई कम की है। इसी वजह से इस बार बीज बच गया है। हालांकि, यह बीज अभी विभाग के वितरण केंद्रों में बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा।
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माना जा रहा है कि इस बार पहले की अपेक्षा काफी कम किसानों ने मक्की की बिजाई करने में दिलचस्पी दिखाई। मक्की के बीज की बिक्री कम होने का फिलहाल यही कारण माना जा रहा है। इससे पहले 1500 से लेकर 1800 क्विंटल मक्की के बीच हर वर्ष खपत रहती थी। इस बार मक्की के बीज की बिक्री की आंकड़ा 1100 क्विंटल तक ही पहुंच पाया है। विभाग पहली मांग के बाद दो से तीन बार मक्की का बीज मंगवाता रहा है। इस बार एक बार आया बीज की विक्रय करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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गौरतलब है कि एक तरफ जिले के किसान मक्की की खेती करते हैं, दूसरी तरफ अब बाजार और चरी उगाने को लेकर उनका रुझान बढ़ा है। किसानों की मानें तो बंदरों के उत्पात के चलते मक्की की फसल ज्यादा प्रभावित होती है। ऐसे में उनका मक्की के प्रति रुझान कम हुआ है। उधर, कृषि विभाग चंबा के उपनिदेशक डॉ. कुलदीप धीमान ने कहा कि इस बार अब तक 1100 क्विंटल तक मक्की का बीज बिका है। अभी भी करीब 150 क्विंटल बीज विभाग के पास उपलब्ध है।