{"_id":"62643859b94b212f4b2f3b8d","slug":"life-being-put-at-risk-by-sitting-in-42-condom-buses-chamba-news-sml4066225136","type":"story","status":"publish","title_hn":"एचआरटीसी की कंडम बसों के सहारे जिंदगी का सफर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एचआरटीसी की कंडम बसों के सहारे जिंदगी का सफर
विज्ञापन
चंबा में परिवहन निगम की बस का टूटा पिछल शीशा।
- फोटो : Chamba
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंबा। जिले के लोग एचआरटीसी की खटारा बसों में सफर करने के लिए मजबूर हैं। एक ओर जहां बसों के शीशे टूटे हुए हैं तो वहीं दूसरी ओर कई गाड़ियों के सीट कवर भी फट चुके हैं। लंबी दूरी और लोकल रूट की बसों में सीटों की हालत बेहद खराब है। शनिवार को न्यू बस स्टैंड चंबा और एचआरटीसी की कार्यशाला (वर्कशॉप) में खड़ी गाड़ियों की संवाददाता ने पड़ताल की। इसमें पाया गया कि एक दर्जन से अधिक बसों की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे। कई बसों के फ्रंट शीशे में दरारें पाई गईं। एक बस में पिछले शीशे की जगह टीन का टुकड़ा लगा रखा था।
जानकारी के मुताबिक जिले में वर्तमान में एचआरटीसी डिपो चंबा में 146 बसें हैं। एचआरटीसी प्रबंधन 106 रूटों पर बस सेवा मुहैया करवा रहा है। इनमें 42 बसें ऐसी हैं जिनकी वैल्यू जीरो हो गई है। इसके अलावा दस बसें नौ साल की अवधि पूरी कर चुकी हैं। गौरतलब है कि गत चार सालों में चंबा डिपो में बसों की संख्या बढ़ नहीं पाई है। इसके चलते विभिन्न रूटों पर खस्ताहाल बसों को दुरुस्त कर दौड़ाना निगम की मजबूरी बनता जा रहा है। ऐसे में ये बसें बीच राह ही दम तोड़ रही हैं। इसके चलते यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। हालांकि, जनजातीय क्षेत्र भरमौर के लिए चार ट्रैवलर गाड़ियां मिली हैं जो क्षेत्र के लोकल रूटों पर दौड़ रही हैं।
कार्यकारी आरएम साहिल कपूर का कहना है कि व्यवस्था बनाकर बसों को रूटों पर भेजा जा रहा है। कहा कि सरकार से नई बसों को लेकर मांग की गई है। उन्होंने बताया कि बसों की खस्ताहालत को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक जिले में वर्तमान में एचआरटीसी डिपो चंबा में 146 बसें हैं। एचआरटीसी प्रबंधन 106 रूटों पर बस सेवा मुहैया करवा रहा है। इनमें 42 बसें ऐसी हैं जिनकी वैल्यू जीरो हो गई है। इसके अलावा दस बसें नौ साल की अवधि पूरी कर चुकी हैं। गौरतलब है कि गत चार सालों में चंबा डिपो में बसों की संख्या बढ़ नहीं पाई है। इसके चलते विभिन्न रूटों पर खस्ताहाल बसों को दुरुस्त कर दौड़ाना निगम की मजबूरी बनता जा रहा है। ऐसे में ये बसें बीच राह ही दम तोड़ रही हैं। इसके चलते यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। हालांकि, जनजातीय क्षेत्र भरमौर के लिए चार ट्रैवलर गाड़ियां मिली हैं जो क्षेत्र के लोकल रूटों पर दौड़ रही हैं।
विज्ञापन
कार्यकारी आरएम साहिल कपूर का कहना है कि व्यवस्था बनाकर बसों को रूटों पर भेजा जा रहा है। कहा कि सरकार से नई बसों को लेकर मांग की गई है। उन्होंने बताया कि बसों की खस्ताहालत को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
विज्ञापन