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Chamba News: मिड-डे मील वर्करों के लिए लागू नहीं किए जा रहे श्रम कानून
Sat, 09 Dec 2023 10:38 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 09 Dec 2023 10:38 PM IST
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मिड डे मील वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू के जिला अधिवेशन चंबा में मौजूद सीटू पदाधिकारी समेत अन्य
चंबा। प्रदेश में मिड-डे मील वर्करों को चार हजार रुपये वेतनमान देकर उनके साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इतने कम मानदेय में वे परिवार का पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं।
यह बात मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू के जिला अधिवेशन में सीटू के जिला सचिव सुदेश ने कही। उन्होंने कहा कि सरकार ने न्यूनतम वेतन 375 रुपये प्रतिदिन तय किया है, लेकिन मिड-डे मील वर्करों के लिए श्रम कानून लागू नहीं किए जा रहे हैं। 45वें और 46वें श्रम सम्मेलन में तय किया गया है कि न्यूनतम वेतन महंगाई के हिसाब से 26,000 रुपये होना चाहिए, तभी एक परिवार अपना जीवनयापन कर सकता है। श्रम कानून के तहत कर्मचारियों के लिए छुट्टी का प्रावधान है, लेकिन मिड-डे मील वर्कर आपातकालीन स्थिति में छुट्टी नहीं ले सकते हैं। सरकारें मिड-डे मील वर्करों के लिए कुछ नहीं करना चाहती हैं। कहा कि देश में समस्त कर्मचारियों को 12 माह का वेतनमान मिलता है, लेकिन मिड-डे मील वर्कर शिक्षा विभाग के कर्मचारी हैं। इन्हें महज 10 माह का वेतन मिलता है। यह एक अन्यायपूर्ण व्यवस्था है। इसके खिलाफ मिड-डे मील वर्कर निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।
यूनियन ने मांग उठाई है कि मिड-डे मील वर्कर को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और ग्रैच्युटी दी जए। इस दौरान सीटू की जिला कमेटी का विस्तार भी किया गया। इस दौरान नए कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जगदीश को चुना गया। अधिवेशन में जिले के सभी शिक्षा खंडों से 100 से अधिक लोगों ने भाग लिया। अधिवेशन में जिला कार्यकारी अध्यक्ष जगदीश, जिला सचिव सविता, उपाध्यक्ष होशियार सिंह, सह सचिव रविंद्र और वरिता, कमेटी सदस्य जगदीश पंडित, कौशल्या, ऋतु, सुमित्रा, सरोज, कुसुम, रजनी, चंद्रमणि और बंटी आदि शामिल रहे।
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यह बात मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू के जिला अधिवेशन में सीटू के जिला सचिव सुदेश ने कही। उन्होंने कहा कि सरकार ने न्यूनतम वेतन 375 रुपये प्रतिदिन तय किया है, लेकिन मिड-डे मील वर्करों के लिए श्रम कानून लागू नहीं किए जा रहे हैं। 45वें और 46वें श्रम सम्मेलन में तय किया गया है कि न्यूनतम वेतन महंगाई के हिसाब से 26,000 रुपये होना चाहिए, तभी एक परिवार अपना जीवनयापन कर सकता है। श्रम कानून के तहत कर्मचारियों के लिए छुट्टी का प्रावधान है, लेकिन मिड-डे मील वर्कर आपातकालीन स्थिति में छुट्टी नहीं ले सकते हैं। सरकारें मिड-डे मील वर्करों के लिए कुछ नहीं करना चाहती हैं। कहा कि देश में समस्त कर्मचारियों को 12 माह का वेतनमान मिलता है, लेकिन मिड-डे मील वर्कर शिक्षा विभाग के कर्मचारी हैं। इन्हें महज 10 माह का वेतन मिलता है। यह एक अन्यायपूर्ण व्यवस्था है। इसके खिलाफ मिड-डे मील वर्कर निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।
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यूनियन ने मांग उठाई है कि मिड-डे मील वर्कर को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और ग्रैच्युटी दी जए। इस दौरान सीटू की जिला कमेटी का विस्तार भी किया गया। इस दौरान नए कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जगदीश को चुना गया। अधिवेशन में जिले के सभी शिक्षा खंडों से 100 से अधिक लोगों ने भाग लिया। अधिवेशन में जिला कार्यकारी अध्यक्ष जगदीश, जिला सचिव सविता, उपाध्यक्ष होशियार सिंह, सह सचिव रविंद्र और वरिता, कमेटी सदस्य जगदीश पंडित, कौशल्या, ऋतु, सुमित्रा, सरोज, कुसुम, रजनी, चंद्रमणि और बंटी आदि शामिल रहे।
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