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खजियार झील को 150 साल पुराने स्वरूप में लाने की तैयारी
ब्यूरो, अमर उजाला (चंबा)
Updated Fri, 18 Mar 2016 06:42 PM IST
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खजियार झील का फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
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विश्व प्रसिद्ध खजियार झील को 150 साल पहले के स्वरूप में लाने की तैयारी की जा रही है। इसके के लिए मास्टर प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। 6.24 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में 60 लाख रुपये सिर्फ वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर ही खर्च किए जाएंगे।
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वन विभाग रुड़की के भू गर्भ संस्थान के संपर्क में है और बजट को लेकर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है। वैज्ञानिक तरीके से खुदाई कर झील में जमा दलदल को बाहर निकाला जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय भू गर्भ संस्थान रुड़की के वैज्ञानिक शोध के लिए तैयार हैं। लेकिन संस्थान ने इस शोध के एवज में वन विभाग के सामने लाखों रुपये की मांग रखी है। इस राशि के अदा होने पर यह टीम करीब छह महीने तक खजियार में रहकर झील के सभी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करेगी।
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इस प्लान के आधार पर वन विभाग 6 करोड़ 24 लाख रुपये की राशि खर्च करेगा। हालांकि खजियार झील सेंचुरी एरिया में आती है और विशेष अनुमति के बगैर यहां कोई भी छेड़छाड़ संभव नहीं है। वन विभाग इतना बड़ा प्रोजेक्ट छेड़ने से पूर्व इसका तोड़ निकाल रहा है। झील की सफाई को ईको फ्रेंडली ग्रुप में करवाने की बात कही जा रही है ताकि सेंचुरी एरिया में स्थापित इस झील के अस्तित्व को बचाया जा सके। वन विभाग ने झील में जमा गाद की पैमाइश की है। जिसमें इसके 35 से 50 फीट तक होने का खुलासा हुआ है।
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30 साल पहले झील में था साफ पानी
करीब 30 वर्ष पूर्व तक खजियार झील बिल्कुल साफ थी। झील के बीच में मिट्टी और घास का छोटा सा टुकड़ा था जो पूरी झील में घूमता था और पानी को साफ रखता था। इसके साथ ही झील में प्राकृतिक तौर ऐसी व्यवस्था थी जिसमें बारिश के दौरान जब बाहर का पानी झील के अंदर आता था तो झील के अंदर का पानी उसे बाहर धकेल देता था। कुछ साल पहले झील की अवैज्ञानिक तरीके से खुदाई की गई और तब से गाद तेजी से बढ़ना शुरू हो गया।
दो बार हुआ है गहराई मापने का प्रयास
वन्य प्राणी विभाग खजियार झील की गहराई मापने का प्रयास दो बार कर चुका है। जिसमें पहली बार एक बड़े से पत्थर को रस्सी से बांधकर झील में फेंका गया था। यह पत्थर करीब 35 फीट नीचे जाने के बाद अटक गया था। जबकि इसके बाद बीस फीट की तीन पाइपों को आपस में जोड़कर झील में डाला था लेकिन इनमें से दो पाइपें झील में ही धंस गई और गहराई का सही पता नहीं चल पाया।
रुड़की संस्थान से चल रही है बातचीत : पूर्ण चंद
वन्य प्राणी विभाग खजियार के प्रभारी पूर्ण चंद का कहना है कि रुड़की संस्थान से बातचीत चल रही है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो इस बार गर्मियों में टीम खजियार आ सकती है और उसके बाद खजियार झील की बेहतरी पर काम शुरू हो जाएगा। झील के अस्तित्व को 150 साल पीछे ले जाने के उद्देश्य से वन विभाग काम कर रहा है।