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Chamba News: दो साल में 40 लाख निगल गई खज्जियार झील की गाद
Thu, 11 Apr 2024 10:26 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 11 Apr 2024 10:26 PM IST
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पर्यटन स्थल खज्जियार में गाद से लबालब भरी प्राकृतिक झील। स्त्रोंत-संवाद।
घटन के बजाय और बढ़ गया गाद का दायरा, अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है झील
लोग बोले - झील के संरक्षण के लिए व्यापक योजना नहीं बनी तो खत्म हो जाएगा पर्यटन कारोबार
डीके शर्मा
खज्जियार (चंबा)। खज्जियार को पहचान देने वाली प्राकृतिक झील अपने अस्तित्व के लिए जंग लड़ रही है। इस झील को संवारने के लिए अब तक करोड़ों की राशि खर्च हो चुकी है, मगर झील की गाद कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि अब झील की गाद ने अपना दायरा और बढ़ा दिया है। वन विभाग की मानें तो पिछले दो साल में करीब 40 लाख रुपये की राशि झील से गाद निकालने पर खर्च की गई है। हालात यह हैं कि 40 लाख रुपये की राशि भी झील से गाद को कम नहीं कर पाई है। अब स्थिति यह है कि खज्जियार की प्राकृतिक झील के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि खज्जियार का बड़ा मैदान और उस पर प्राकृतिक झील इसे मिनी स्विट्जरलैंड की ख्याति दिलाती है। पिछले करीब दो दशकों से झील में गाद बढ़ती जा रही है। बहरहाल, कि यह झील अपने अस्तित्व के साथ जंग लड़ रही है। बढ़ती गाद को स्थानीय लोगों ने एक बड़ी समस्या बताया। कहा कि यह गाद झील को नुकसान पहुंचा रही है। संवाद
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जिस झील की वजह से खज्जियार को नई पहचान मिली। अब वही झील खराब होती जा रही है। एक तरफ पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे किए जाते हैं, दूसरी तरफ झील के संरक्षण के लिए व्यापक योजना नहीं बन पाई है। - विक्रम नरूला
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विभाग झील के जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की बात करता है, मगर इस बजट को एक स्थानी योजना के साथ खर्च नहीं किया गया है। बहरहाल, प्राकृतिक झील में अब खाद का क्षेत्रफल बढ़ता जा रहा है। - पवन पंडोत्रा
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खज्जियार मैदान और झील को देखने के लिए ही देश-विदेश से यहां पर्यटक पहुंचते हैं, जब झील का अस्तित्व खत्म हो जाएगा तो यहां पर्यटकों की संख्या में काफी हद तक गिरावट होगी। इससे पर्यटन कारोबार सिमट जाएगा। - सोनू कुमार
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खज्जियार झील के संरक्षण के लिए प्रशासन और विभाग को एक बेहतर योजना बनानी चाहिए, जिससे इस झील का संरक्षण हो सकें। प्रशासन को खज्जियार के सौंदर्यीकरण के लिए अलग से बजट का प्रावधान करना चाहिए। - सुरजीत कुमार
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वन रक्षक विपन कुमार का कहना है कि पिछले दो साल से झील से खाद निकालने के लिए 40 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। कहा कि आदर्श आचार संहिता हटने के बाद अब आगामी योजना तैयार की जाएगी।
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लोग बोले - झील के संरक्षण के लिए व्यापक योजना नहीं बनी तो खत्म हो जाएगा पर्यटन कारोबार
डीके शर्मा
खज्जियार (चंबा)। खज्जियार को पहचान देने वाली प्राकृतिक झील अपने अस्तित्व के लिए जंग लड़ रही है। इस झील को संवारने के लिए अब तक करोड़ों की राशि खर्च हो चुकी है, मगर झील की गाद कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि अब झील की गाद ने अपना दायरा और बढ़ा दिया है। वन विभाग की मानें तो पिछले दो साल में करीब 40 लाख रुपये की राशि झील से गाद निकालने पर खर्च की गई है। हालात यह हैं कि 40 लाख रुपये की राशि भी झील से गाद को कम नहीं कर पाई है। अब स्थिति यह है कि खज्जियार की प्राकृतिक झील के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि खज्जियार का बड़ा मैदान और उस पर प्राकृतिक झील इसे मिनी स्विट्जरलैंड की ख्याति दिलाती है। पिछले करीब दो दशकों से झील में गाद बढ़ती जा रही है। बहरहाल, कि यह झील अपने अस्तित्व के साथ जंग लड़ रही है। बढ़ती गाद को स्थानीय लोगों ने एक बड़ी समस्या बताया। कहा कि यह गाद झील को नुकसान पहुंचा रही है। संवाद
जिस झील की वजह से खज्जियार को नई पहचान मिली। अब वही झील खराब होती जा रही है। एक तरफ पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे किए जाते हैं, दूसरी तरफ झील के संरक्षण के लिए व्यापक योजना नहीं बन पाई है। - विक्रम नरूला
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विभाग झील के जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की बात करता है, मगर इस बजट को एक स्थानी योजना के साथ खर्च नहीं किया गया है। बहरहाल, प्राकृतिक झील में अब खाद का क्षेत्रफल बढ़ता जा रहा है। - पवन पंडोत्रा
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खज्जियार मैदान और झील को देखने के लिए ही देश-विदेश से यहां पर्यटक पहुंचते हैं, जब झील का अस्तित्व खत्म हो जाएगा तो यहां पर्यटकों की संख्या में काफी हद तक गिरावट होगी। इससे पर्यटन कारोबार सिमट जाएगा। - सोनू कुमार
खज्जियार झील के संरक्षण के लिए प्रशासन और विभाग को एक बेहतर योजना बनानी चाहिए, जिससे इस झील का संरक्षण हो सकें। प्रशासन को खज्जियार के सौंदर्यीकरण के लिए अलग से बजट का प्रावधान करना चाहिए। - सुरजीत कुमार
वन रक्षक विपन कुमार का कहना है कि पिछले दो साल से झील से खाद निकालने के लिए 40 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। कहा कि आदर्श आचार संहिता हटने के बाद अब आगामी योजना तैयार की जाएगी।