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Chamba News: पांगी में 12 दिन तक रही जुकारू उत्सव की धूम
Fri, 23 Feb 2024 07:13 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 23 Feb 2024 07:13 PM IST
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चंबा के पांगी में जुकारू उत्सव के दौरान लोग।संवाद
पांगी में 12 दिन तक रही जुकारू उत्सव की धूम
घाटी में नाग देवता के त्योहार के साथ हुआ उत्सव का समापन, घर के मुखिया करते हैं पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी का जुकारू उत्सव 12 दिन बाद नाग देवता के त्योहार के साथ किलाड़ में संपन्न हो गया। इस त्योहार को हर साल किलाड़ की प्रजामंडल की ओर से मनाया जाता है। नाग देवता का यह त्योहार किलाड़ के पांच गांव में मनाया जाता है। मान्यता है कि जिस वर्ष चिह्नित गांव में नाग देवता को स्थापित किया जाता है, उसी दिन गांव के लोग इस मेले की पूरी व्यवस्था करते हैं। मेले में भाग लेने वाले नाग देवता के कारीगरों समेत कई लोगों के खान-पान की व्यवस्था की गांव वासियों की जिम्मेदारी रहती है। इस वर्ष यह उत्सव किलाड़ के परमस गांव में मनाया जा रहा है। गांव में 5 साल बाद काफी उत्साह देखने को मिला। जिस दिन जुकारू उत्सव शुरू होता है और पड़ीद के दिन नाग देवता को गांव के नाग देवता की कोठी यानी नागदेवता के घर में स्थापित किया जाता है। अगले 13 दिन तक उसे घर का मुखिया सुबह-शाम नाग देवता की पूजा-अर्चना व नाग देवता को भोग लगाता है। इस वर्ष नाग देवता का यह त्योहार परमस गांव के निवासी देवीलाल के घर में मनाया गया। मेले का समापन नाग देवता को वापस उनके स्थान पर पहुंचाने के साथ हुआ। मेले में पहुंचे नाग देवता के कारीगरों ने मशालों और फूलों से सजाकर नाग देवता को महालियत में पहुंचाया।
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घाटी में नाग देवता के त्योहार के साथ हुआ उत्सव का समापन, घर के मुखिया करते हैं पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी का जुकारू उत्सव 12 दिन बाद नाग देवता के त्योहार के साथ किलाड़ में संपन्न हो गया। इस त्योहार को हर साल किलाड़ की प्रजामंडल की ओर से मनाया जाता है। नाग देवता का यह त्योहार किलाड़ के पांच गांव में मनाया जाता है। मान्यता है कि जिस वर्ष चिह्नित गांव में नाग देवता को स्थापित किया जाता है, उसी दिन गांव के लोग इस मेले की पूरी व्यवस्था करते हैं। मेले में भाग लेने वाले नाग देवता के कारीगरों समेत कई लोगों के खान-पान की व्यवस्था की गांव वासियों की जिम्मेदारी रहती है। इस वर्ष यह उत्सव किलाड़ के परमस गांव में मनाया जा रहा है। गांव में 5 साल बाद काफी उत्साह देखने को मिला। जिस दिन जुकारू उत्सव शुरू होता है और पड़ीद के दिन नाग देवता को गांव के नाग देवता की कोठी यानी नागदेवता के घर में स्थापित किया जाता है। अगले 13 दिन तक उसे घर का मुखिया सुबह-शाम नाग देवता की पूजा-अर्चना व नाग देवता को भोग लगाता है। इस वर्ष नाग देवता का यह त्योहार परमस गांव के निवासी देवीलाल के घर में मनाया गया। मेले का समापन नाग देवता को वापस उनके स्थान पर पहुंचाने के साथ हुआ। मेले में पहुंचे नाग देवता के कारीगरों ने मशालों और फूलों से सजाकर नाग देवता को महालियत में पहुंचाया।