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Chamba News: जुकारू उत्सव ... छोटे में बड़ों के चरण स्पर्श कर लिया आशीर्वाद

Sat, 10 Feb 2024 10:01 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Sat, 10 Feb 2024 10:01 PM IST
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Jukaaru Utsav...the little one touched the feet of the elders and got blessings
चंबा के पांगी में जुकारू उत्सव मनाने के दौरान पूजा करने के लिए बैठा नौनिहाल।संवाद
चंबा। जनजातीय क्षेत्र पांगी में पारंपरिक और आपसी भाईचारे का प्रतीक जुकारू पर्व शनिवार को धूमधाम से मनाया गया।
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शनिवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर लोग स्नान के बाद राजा बलि के समक्ष नतमस्तक हुए। अनुजों ने बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। पनघट से राजा बलि के लिए लाए गए जल की पूजा-अर्चना की गई। घर के मुखिया ने चूर की पूजा की। चूर का इस्तेमाल खेत में हल जोतने के काम आता है। पडीद की सुबह होते ही जुकारू उत्सव शुरू हो गया।

आपसी भाईचारे और संस्कृति के रूप में पांगीवासी जुकारू पर्व मनाते हैं। इसका तीसरा दिन मांगल या पन्हेई के रूप में मनाया जाता है। पन्हेई किलाड़ परगने में मनाई जाती है साच परगना में मांगल मनाई जाती है। मनाने का उद्देश्य एवं विधि एक जैसी ही है। फर्क इतना है कि साच परगने में मांगल जुकारू के तीसरे दिन मनाई जाती है तथा पन्हेई किलाड़ परगने में पांचवें दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग भूमि पूजन के लिए निर्धारित स्थान पर इकट्ठा होते हैं। हर घर से सत्तू, घी, शहद और आटे से बनाए बकरे तथा जौ, गेहूं आदि का बीज लाया जाता है। घर से लाई पूजा सामग्री को आपस में बांटा जाता है। भूमि पूजन के बाद नाच-गान किया जाता है। इस त्योहार के बाद पंगवाल लोग खेतों में काम शुरू कर देते हैं। इस मेले को ‘उवान’ ‘ईवान’ आदि नामों से भी जाना जाता है। यह मेला किलाड़ तथा धरवास पंचायत में तीन दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन मेला राजा के निमित दूसरे दिन प्रजा के लिए मनाया जाता है और तीसरा दिन नाग देवता के लिए मनाया जाता है, यह मेला माघ और फागुन मास में मनाया जाता है। उवान के दौरान स्वांग नृत्य भी होता है। इस दिन नाग देवता के कारदार को स्वांग बनाया जाता है। लंबी लंबी दाढ़ी मूछ पर मुकुट पहने सिर पर लंबी-लंबी जटाएं हाथ में कटार लिए स्वांग को मेले में लाया जाता है। दिन भर नृत्य के बाद स्वांग को उसके घर पहुंचाया जाता है इसी के साथ ईवान मेला समाप्त हो जाता है।
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