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जेबीटी प्रशिक्षुओं ने कक्षाओं का किया बहिष्कार
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चंबा। हाईकोर्ट के फैसले पर चंबा के जेबीटी प्रशिक्षुओं ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। जेबीटी शिक्षकों के पक्ष में फैसला न आने पर शनिवार को जेबीटी प्रशिक्षुओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। अविनाश कुमार, अशोक ठाकुर, आशीष कुमार, अनीश कुमार, सुनील कुमार, नीलम कुमारी, संदीप कुमारी, दीक्षा कुमारी, भूपेंद्र कुमार, यूसुफ, अदिति कुमारी का कहना है कि जब तक फैसला उनके पक्ष में नहीं आता है, तब तक वे कक्षाओं का बहिष्कार करते रहेंगे।
प्रदेश सरकार ने जेबीटी शिक्षकों के साथ अन्याय किया है। इसका खामियाजा सरकार को आगामी विस चुनाव में भुगतना पड़ेगा। उनका कहना है कि जब बीएड डिग्रीधारक जेबीटी में आ जाएंगे तो उनका अस्तित्व खत्म हो जाएगा। उन्होंने बताया कि जेबीटी का कोर्स जमा दो के बाद होता है, जबकि बीएड के लिए स्नातक के बाद दो वर्ष का कोर्स रहता है।
इससे उनकी शिक्षा में भी काफी अंतर है। इसके अतिरिक्त जेबीटी अध्यापकों को बच्चों को पांचवीं कक्षा तक पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि बीएड डिग्रीधारक माध्यमिक स्तर की कक्षाओं को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान आदि में इसी तरह के निर्णय को लेकर फैसला जेबीटी शिक्षकों के पक्ष में आया है। उन्होंने सरकार और प्रदेश उच्च न्यायालय से गुहार लगाई है कि इस मामले पर दोबारा फैसला लिया जाए।
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प्रदेश सरकार ने जेबीटी शिक्षकों के साथ अन्याय किया है। इसका खामियाजा सरकार को आगामी विस चुनाव में भुगतना पड़ेगा। उनका कहना है कि जब बीएड डिग्रीधारक जेबीटी में आ जाएंगे तो उनका अस्तित्व खत्म हो जाएगा। उन्होंने बताया कि जेबीटी का कोर्स जमा दो के बाद होता है, जबकि बीएड के लिए स्नातक के बाद दो वर्ष का कोर्स रहता है।
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इससे उनकी शिक्षा में भी काफी अंतर है। इसके अतिरिक्त जेबीटी अध्यापकों को बच्चों को पांचवीं कक्षा तक पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि बीएड डिग्रीधारक माध्यमिक स्तर की कक्षाओं को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान आदि में इसी तरह के निर्णय को लेकर फैसला जेबीटी शिक्षकों के पक्ष में आया है। उन्होंने सरकार और प्रदेश उच्च न्यायालय से गुहार लगाई है कि इस मामले पर दोबारा फैसला लिया जाए।
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