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3 से 19 वर्ष की उम्र में सही राह मिलना जरूरी : श्वेता
Wed, 17 Jul 2024 10:29 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 17 Jul 2024 10:29 PM IST
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चंबा। संत निरंकारी सत्संग भवन मुगला में जोन स्तरीय महिला संत समागम का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता महिला संत श्वेता ने की। सत्संग का शुभारंभ आरती वंदना से किया गया।
सत्संग में बनीखेत, डल्हौजी, बकलोह, चुवाड़ी, खैरी, साहो, जडेरा, राख, जांघी, मैहला, मंगला आदि क्षेत्रों से निरंकारी अनुयायियों ने भाग लिया। मंच पर विराजमान महिला संत ने अपने सार गर्भित प्रवचनों से साध-संगत को भाव विभौर करते हुए कहा कि संत निरंकारी मिशन के विकास में शुरू से ही महिलाओं का अनुकरणीय एवं महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मिशन के संस्थापक बाबा बूटा सिंह की पत्नी वंती, बाबा अवतार सिंह की पत्नी बुद्धवंती, निरंकारी राजमाता कुलवंत कौर, सद्गुरु माता सविंदर हरदेव और वर्तमान में सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज का असाधारण योगदान महिला जगत का ही नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति का निरंतर मार्ग दर्शन करता रहा है, जिससे युवा पीढ़ी मिशन के सिखाए आध्यात्मिक मूल्यों के साथ सहज ही जुड़ती गई। इसके परिणाम स्वरूप आज इस मिशन के नौजवान और युवतियां सक्रियता से भाग ले रही हैं। कहा जाता है कि 13 से 19 वर्ष की उम्र जीवन का एक नाजुक मोड़ होता है। इस उम्र में मानव को सही राह मिलना आवश्यक होता है। महात्मा ने कहा कि आज सद्गुरु माता सुदीक्षा चाहती हैं कि हम आपस में और सभी के साथ प्रेम से जिएं। कहा कि मानव मात्र से प्यार करना ही परमात्मा से प्यार करना है। यह जानकारी सेवादार विनोद कुमार ने दी।
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सत्संग में बनीखेत, डल्हौजी, बकलोह, चुवाड़ी, खैरी, साहो, जडेरा, राख, जांघी, मैहला, मंगला आदि क्षेत्रों से निरंकारी अनुयायियों ने भाग लिया। मंच पर विराजमान महिला संत ने अपने सार गर्भित प्रवचनों से साध-संगत को भाव विभौर करते हुए कहा कि संत निरंकारी मिशन के विकास में शुरू से ही महिलाओं का अनुकरणीय एवं महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मिशन के संस्थापक बाबा बूटा सिंह की पत्नी वंती, बाबा अवतार सिंह की पत्नी बुद्धवंती, निरंकारी राजमाता कुलवंत कौर, सद्गुरु माता सविंदर हरदेव और वर्तमान में सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज का असाधारण योगदान महिला जगत का ही नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति का निरंतर मार्ग दर्शन करता रहा है, जिससे युवा पीढ़ी मिशन के सिखाए आध्यात्मिक मूल्यों के साथ सहज ही जुड़ती गई। इसके परिणाम स्वरूप आज इस मिशन के नौजवान और युवतियां सक्रियता से भाग ले रही हैं। कहा जाता है कि 13 से 19 वर्ष की उम्र जीवन का एक नाजुक मोड़ होता है। इस उम्र में मानव को सही राह मिलना आवश्यक होता है। महात्मा ने कहा कि आज सद्गुरु माता सुदीक्षा चाहती हैं कि हम आपस में और सभी के साथ प्रेम से जिएं। कहा कि मानव मात्र से प्यार करना ही परमात्मा से प्यार करना है। यह जानकारी सेवादार विनोद कुमार ने दी।
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