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जूनोटिक बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की मांग : डॉ. राजेश गुलेरी
Sat, 06 Jul 2024 05:08 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 06 Jul 2024 05:08 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा जोनल अस्पताल धर्मशाला में वर्ल्ड जूनोसिस-डे का आयोजन
पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियां आज सबसे बड़ी चिंता का विषय
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। जिला कांगड़ा स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को वर्ल्ड जूनोसिस-डे जोनल अस्पताल धर्मशाला में मनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएमओ कांगड़ा डॉ. राजेश गुलेरी ने की। इस दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील भट्ट, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तरुण सूद और डॉ. श्रुति उपस्थित रहे।
इस मौके पर डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि वर्ल्ड जूनोसिस डे मनाने के पीछे का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। जूनोटिक बीमारियों के बढ़ते खतरे के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की मांग बन गई है। कोविड के बाद पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 6 जुलाई को वर्ल्ड जूनोसिस-डे मनाया जाता है। इन बीमारियों को जिन्हें जूनोज के रूप में भी जाना जाता है में स्वाइन फ्लू, रेबीज, बर्ड फ्लू , स्क्रब टाइफस, इबोला, जीका वायरस, कोविड-19 और विभिन्न खाद्य जनित संक्रमण शामिल हैं। सभी ज्ञात बीमारियों में से लगभग 60 प्रतिशत प्रकृति में जूनोटिक हैं और लगभग 70 प्रतिशत उभरते संक्रमण जानवरों से उत्पन्न होते हैं। जूनोटिक बीमारियों के लक्षण विशिष्ट बीमारी के आधार पर अलग-अलग होते हैं। इसके कुछ सामान्य लक्षणों में बुखार, थकान, सिरदर्द, शरीर में दर्द, चकत्ता, खरोंच आदि है। इससे बचाव के लिए स्वच्छता, घर से बाहर जाते समय पूरी तरह शरीर ढककर रखना और आसपास स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बता दें कि पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियां आज सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने बताया कि वर्ल्ड जूनोसिस-डे फ्रेंच जीव वैज्ञानिक लुई पाश्चर के रेबीज का टीका तैयार करने में मिली सफलता की स्मृति में मनाया जाता है। इस गतिविधि के दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तरुण ने इस वर्ष 2024 के थीम वन वर्ल्ड, वन हेल्थ प्रीवेंट जूनोसिस, स्टॉप द स्प्रेड, कंट्रोल जूनोटिक डिजीज से लोगों में जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया। यह मानव स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा, कृषि, पर्यावरण विज्ञान और वन्यजीव संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग और संचार के महत्व पर जोर देता है। वन हेल्थ दृष्टिकोण को अपनाकर, हितकारकों को जूनोटिक रोगों को समग्र रूप से संबोधित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। जिला कांगड़ा स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को वर्ल्ड जूनोसिस-डे जोनल अस्पताल धर्मशाला में मनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएमओ कांगड़ा डॉ. राजेश गुलेरी ने की। इस दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील भट्ट, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तरुण सूद और डॉ. श्रुति उपस्थित रहे।
इस मौके पर डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि वर्ल्ड जूनोसिस डे मनाने के पीछे का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। जूनोटिक बीमारियों के बढ़ते खतरे के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की मांग बन गई है। कोविड के बाद पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 6 जुलाई को वर्ल्ड जूनोसिस-डे मनाया जाता है। इन बीमारियों को जिन्हें जूनोज के रूप में भी जाना जाता है में स्वाइन फ्लू, रेबीज, बर्ड फ्लू , स्क्रब टाइफस, इबोला, जीका वायरस, कोविड-19 और विभिन्न खाद्य जनित संक्रमण शामिल हैं। सभी ज्ञात बीमारियों में से लगभग 60 प्रतिशत प्रकृति में जूनोटिक हैं और लगभग 70 प्रतिशत उभरते संक्रमण जानवरों से उत्पन्न होते हैं। जूनोटिक बीमारियों के लक्षण विशिष्ट बीमारी के आधार पर अलग-अलग होते हैं। इसके कुछ सामान्य लक्षणों में बुखार, थकान, सिरदर्द, शरीर में दर्द, चकत्ता, खरोंच आदि है। इससे बचाव के लिए स्वच्छता, घर से बाहर जाते समय पूरी तरह शरीर ढककर रखना और आसपास स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बता दें कि पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियां आज सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं।
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जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने बताया कि वर्ल्ड जूनोसिस-डे फ्रेंच जीव वैज्ञानिक लुई पाश्चर के रेबीज का टीका तैयार करने में मिली सफलता की स्मृति में मनाया जाता है। इस गतिविधि के दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तरुण ने इस वर्ष 2024 के थीम वन वर्ल्ड, वन हेल्थ प्रीवेंट जूनोसिस, स्टॉप द स्प्रेड, कंट्रोल जूनोटिक डिजीज से लोगों में जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया। यह मानव स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा, कृषि, पर्यावरण विज्ञान और वन्यजीव संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग और संचार के महत्व पर जोर देता है। वन हेल्थ दृष्टिकोण को अपनाकर, हितकारकों को जूनोटिक रोगों को समग्र रूप से संबोधित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
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