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Chamba News: चंबा में 60 फीट का रावण, 50-50 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद होंगे आकर्षण
Mon, 19 Oct 2026 10:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 19 Oct 2026 10:51 PM IST
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चंबा चौगान में पुतलों को खड़ा करने के लिए जगह बनाते मजदूर।संवाद
चार दशक से पुतले गढ़ रहे गंगाराम, पोतियों ममता और परिवार के साथ दे रहे अंतिम रूप
बांस, रस्सी और कागज से आकार ले रहे दशानन के दस सिर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। दशहरे पर चंबा के आसमान के सामने इस बार 60 फीट ऊंचा रावण खड़ा होगा। उसके साथ 50-50 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक बनेंगे।
इन विशाल पुतलों को आकार देने में बिहार के गंगाराम और उनका परिवार दिन-रात जुटा है। करीब 40 वर्षों से रावण के पुतले बनाने वाले गंगाराम अब अपनी पोतियों ममता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ इन्हें अंतिम रूप दे रहे हैं। दशहरा नजदीक आने के साथ काम में तेजी आ गई है।
गंगाराम को पुतले बनाने का करीब 40 साल का अनुभव है। बांस, रस्सी, कागज और अन्य सामग्री से विशाल ढांचा खड़ा करना आसान नहीं होता। पहले बांस को नाप और आकार के अनुसार जोड़कर ढांचा तैयार किया जाता है। फिर रस्सियों से उसे मजबूती दी जाती है और कागज लगाकर पुतले को रूप दिया जाता है। हर हिस्से को संतुलित और आकर्षक बनाने के लिए बारीकी से काम करना पड़ता है।
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गंगाराम के अनुसार वह 120 फीट तक ऊंचे पुतले तैयार कर सकते हैं। हालांकि, इस बार चंबा में रावण की ऊंचाई 60 फीट रखी गई है। पुतले बनाने का काम काफी आगे बढ़ चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 80 फीट तक पुतले का ढांचा तैयार किया जा चुका है। इसे निर्धारित आकार और ऊंचाई के अनुरूप अंतिम रूप दिया जाएगा। कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को भी तय आकार में तैयार किया जा रहा है।
पुतले बनाने में गंगाराम के साथ उनकी पोतियां ममता और परिवार के दूसरे सदस्य भी हाथ बंटा रहे हैं। पूरा परिवार मिलकर ढांचे को मजबूत करने, कागज लगाने और सजावट के काम में जुटा है। लक्ष्य है कि दशहरा पर्व तक तीनों पुतले पूरी तरह तैयार हो जाएं।
दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। विशाल पुतलों को देखने के लिए हर साल लोगों में उत्सुकता रहती है। इस बार 60 फीट का रावण और 50-50 फीट के कुंभकर्ण व मेघनाद चंबा में दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण होंगे। इनके निर्माण में जुटे गंगाराम का चार दशक का अनुभव और परिवार की मेहनत पर्व की तैयारियों को खास बना रही है।
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बांस, रस्सी और कागज से आकार ले रहे दशानन के दस सिर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। दशहरे पर चंबा के आसमान के सामने इस बार 60 फीट ऊंचा रावण खड़ा होगा। उसके साथ 50-50 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक बनेंगे।
इन विशाल पुतलों को आकार देने में बिहार के गंगाराम और उनका परिवार दिन-रात जुटा है। करीब 40 वर्षों से रावण के पुतले बनाने वाले गंगाराम अब अपनी पोतियों ममता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ इन्हें अंतिम रूप दे रहे हैं। दशहरा नजदीक आने के साथ काम में तेजी आ गई है।
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गंगाराम को पुतले बनाने का करीब 40 साल का अनुभव है। बांस, रस्सी, कागज और अन्य सामग्री से विशाल ढांचा खड़ा करना आसान नहीं होता। पहले बांस को नाप और आकार के अनुसार जोड़कर ढांचा तैयार किया जाता है। फिर रस्सियों से उसे मजबूती दी जाती है और कागज लगाकर पुतले को रूप दिया जाता है। हर हिस्से को संतुलित और आकर्षक बनाने के लिए बारीकी से काम करना पड़ता है।
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गंगाराम के अनुसार वह 120 फीट तक ऊंचे पुतले तैयार कर सकते हैं। हालांकि, इस बार चंबा में रावण की ऊंचाई 60 फीट रखी गई है। पुतले बनाने का काम काफी आगे बढ़ चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 80 फीट तक पुतले का ढांचा तैयार किया जा चुका है। इसे निर्धारित आकार और ऊंचाई के अनुरूप अंतिम रूप दिया जाएगा। कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को भी तय आकार में तैयार किया जा रहा है।
पुतले बनाने में गंगाराम के साथ उनकी पोतियां ममता और परिवार के दूसरे सदस्य भी हाथ बंटा रहे हैं। पूरा परिवार मिलकर ढांचे को मजबूत करने, कागज लगाने और सजावट के काम में जुटा है। लक्ष्य है कि दशहरा पर्व तक तीनों पुतले पूरी तरह तैयार हो जाएं।
दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। विशाल पुतलों को देखने के लिए हर साल लोगों में उत्सुकता रहती है। इस बार 60 फीट का रावण और 50-50 फीट के कुंभकर्ण व मेघनाद चंबा में दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण होंगे। इनके निर्माण में जुटे गंगाराम का चार दशक का अनुभव और परिवार की मेहनत पर्व की तैयारियों को खास बना रही है।