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Chamba News: तय समय से दो घंटा देरी से रूटों पर गईं एचआरटीसी बसें
Fri, 10 May 2024 10:26 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 10 May 2024 10:26 PM IST
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चंबा। परिवहन निगम के चंबा डिपो में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। रोजाना कोई न कोई एचआरटीसी बस बीच राह खराब हो रही है। दूसरी ओर, मरम्मत नहीं होने के कारण लंबे रूटों पर भी बसें समय पर रवाना नहीं हो पा रही हैं।
हालात ऐसे हैं कि लंबी दूरी के इन रूटों पर बसें तय समय से दो घंटे तक देरी से रवाना हो रही हैं। ऐसा पिछले कुछ दिन से चल रहा है। तय समय पर बसों के रूटों पर नहीं जाने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीती वीरवार रात को भी चंबा अड्डे में पहुंचे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वीरवार को चंबा-खज्जियार रूट पर बस 6:00 बजे रूट पर निकली। इसका रवाना होने का समय 5:15 बजे का है। चंबा-शिमला रूट की बस 6:00 बजे रवाना हुई। इसका निर्धारित समय 5:00 बजे का है। चंबा-कैला रूट पर भी बस करीब पौना घंटा देरी से करीब 6:00 बजे रवाना हुई। इसका समय 5:20 बजे चलने का है।
चंबा-फटाहर रूट की बस भी रात करीब 10:00 बजे रवाना हुई। इसका चंबा बस अड्डे से चलने का समय रात 8:00 बजे का है। अड्डे पर बस का इंतजार कर रहे यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। वीरवार देर शाम जब अड्डे में काउंटर पर बसें नहीं आईं तो यात्री वर्कशॉप में ही पहुंच गए। निगम प्रबंधन ने बसों का देरी से रूटों पर जाने का कारण बसों और मेकेनिकों की कमी बताया गया।
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डिपो में पांच मेकेनिकों के हवाले 200 बसों की मरम्मत का जिम्मा
एचआरटीसी के चंबा डिपो में मौजूदा समय में लगभग पांच ऐसे मेकेनिक हैं, जिन्हें बसें ठीक करने की पूरी जानकारी है। प्रबंधन का कहना है कि बसों की मरम्मत करने के लिए 60 मेकेनिकों की जरूरत है। डिपो में लगभग 200 सरकारी बसें हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पांच मेकेनिक 200 बसों की मरम्मत कैसे कर पाएंगे। चंबा डिपो में लंबे समय से मेकेनिको की कमी है। ऐसे में बसों की समय पर मरम्मत न हो पाने का खामियाजा सवारियों को भुगतना पड़ रहा है।
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एक महीने में 15 रूटों पर खराब हो चुकी हैं बसें
पिछले एक माह में लगभग 12 से 15 रूटों पर सरकारी बसें बीच राह ही हांफ चुकी हैं। वहीं 12 बसें अभी भी मरम्मत के इंतजार में चंबा बस स्टैंड के वर्कशॉप में खड़ी हैं।
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कार्यवाहक अड्डा प्रभारी चंबा ओम शंकर ने कहा कि चंबा डिपो में मेकेनिकों की काफी आवश्यकता है। वर्तमान में महज पांच मेकेनिक हैं। इन्हें बसों की मरम्मत करने की पूरी जानकारी है। अभी 60 मेकेनिकों की और जरूरत है। इसी वजह से रूटों पर बसें देरी से गई हैं।
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हालात ऐसे हैं कि लंबी दूरी के इन रूटों पर बसें तय समय से दो घंटे तक देरी से रवाना हो रही हैं। ऐसा पिछले कुछ दिन से चल रहा है। तय समय पर बसों के रूटों पर नहीं जाने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीती वीरवार रात को भी चंबा अड्डे में पहुंचे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वीरवार को चंबा-खज्जियार रूट पर बस 6:00 बजे रूट पर निकली। इसका रवाना होने का समय 5:15 बजे का है। चंबा-शिमला रूट की बस 6:00 बजे रवाना हुई। इसका निर्धारित समय 5:00 बजे का है। चंबा-कैला रूट पर भी बस करीब पौना घंटा देरी से करीब 6:00 बजे रवाना हुई। इसका समय 5:20 बजे चलने का है।
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चंबा-फटाहर रूट की बस भी रात करीब 10:00 बजे रवाना हुई। इसका चंबा बस अड्डे से चलने का समय रात 8:00 बजे का है। अड्डे पर बस का इंतजार कर रहे यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। वीरवार देर शाम जब अड्डे में काउंटर पर बसें नहीं आईं तो यात्री वर्कशॉप में ही पहुंच गए। निगम प्रबंधन ने बसों का देरी से रूटों पर जाने का कारण बसों और मेकेनिकों की कमी बताया गया।
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डिपो में पांच मेकेनिकों के हवाले 200 बसों की मरम्मत का जिम्मा
एचआरटीसी के चंबा डिपो में मौजूदा समय में लगभग पांच ऐसे मेकेनिक हैं, जिन्हें बसें ठीक करने की पूरी जानकारी है। प्रबंधन का कहना है कि बसों की मरम्मत करने के लिए 60 मेकेनिकों की जरूरत है। डिपो में लगभग 200 सरकारी बसें हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पांच मेकेनिक 200 बसों की मरम्मत कैसे कर पाएंगे। चंबा डिपो में लंबे समय से मेकेनिको की कमी है। ऐसे में बसों की समय पर मरम्मत न हो पाने का खामियाजा सवारियों को भुगतना पड़ रहा है।
एक महीने में 15 रूटों पर खराब हो चुकी हैं बसें
पिछले एक माह में लगभग 12 से 15 रूटों पर सरकारी बसें बीच राह ही हांफ चुकी हैं। वहीं 12 बसें अभी भी मरम्मत के इंतजार में चंबा बस स्टैंड के वर्कशॉप में खड़ी हैं।
कार्यवाहक अड्डा प्रभारी चंबा ओम शंकर ने कहा कि चंबा डिपो में मेकेनिकों की काफी आवश्यकता है। वर्तमान में महज पांच मेकेनिक हैं। इन्हें बसों की मरम्मत करने की पूरी जानकारी है। अभी 60 मेकेनिकों की और जरूरत है। इसी वजह से रूटों पर बसें देरी से गई हैं।