फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Chamba News ›   Government-provided treatment... but buy the supplies out of your own pocket.

Chamba News: इलाज सरकारी... सामान अपनी जेब से खरीदो

Mon, 20 Jul 2026 10:57 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Mon, 20 Jul 2026 10:57 PM IST
विज्ञापन
Government-provided treatment... but buy the supplies out of your own pocket.
मेडिकल कॉलेज में इलाज करवाने आ रहे मरीजों से बाहर से मंगवाया जा रहा सामान
विज्ञापन

सरकारी योजना में है मुफ्त इलाज का प्रावधान, बाहर से लाने पड़ रहे सिरिंज और कॉटन
एक्सरे मशीन खराब होने के कारण निजी सेंटरों में अधिक पैसे देकर करवा रहे हैं एक्सरे
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। इलाज की उम्मीद लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे मरीजों को दवाइयों की दुकान का रास्ता दिखाया जा रहा है। जहां सरकार मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा करती है, वहीं चंबा मेडिकल कॉलेज में छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी तीमारदारों की जेब हल्की हो रही है।
आकांक्षी जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों को पैसे देकर इलाज करवाना पड़ रहा है। गर्भवतियों के प्रसव के लिए मुफ्त होने वाले ऑपरेशन के लिए भी तीमारदारों को पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। तीमारदार दवाई के साथ सिरिंज और कॉटन तक बाहर से खरीद रहे हैं। जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं का प्रसव (नॉर्मल और सिजेरियन दोनों), दवाइयां, जांच, ब्लड, और डाइट पूरी तरह मुफ्त होती हैं। प्रसव के बाद भी 6 महीने तक मुफ्त स्वास्थ्य लाभ और दवाइयां मिलती हैं। यही हाल अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों का भी है। वार्ड में भर्ती होने के बावजूद दवाइयां बाहर से खरीदकर लानी पड़ रही हैं। आपातकालीन कक्ष में डिजिटल एक्सरे तक नहीं हो रहे हैं।
विज्ञापन


गुवाड़ी के सन्नी ने बताया कि उनके पिता मानो पांच दिन तक चौथी मंजिल में भर्ती रहे। दवाइयों से लेकर हर छोटी चीज बाहर से खरीदकर लाए। स्टाफ नर्स ने उन्हें इंजेक्शन लगाना होता था तो सिरिंज बाहर से खरीदकर लाने के लिए बोला जाता है। पांच दिन में करीब 5000 रुपये की दवाई बाहर से खरीदी। साहो निवासी अशोक कुमार ने बताया कि वह अपनी पत्नी को प्रसव करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज लाए थे। प्रसव से पहले उनसे 1000 रुपये का सामान बाहर से मंगवाया गया। उधर, मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉक्टर मानिक सहगल ने बताया कि अस्पताल में खत्म दवाइयों को उपलब्ध कराने के लिए उचित प्रयास किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
मेडिकल कॉलेज में मरीजों को दवाई के लिए इतनी परेशानी नहीं होनी चाहिए। सरकार और प्रशासन को जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। - दिनेश कुमार
--

दस रुपये का पर्ची शुल्क यदि मरीजों के इलाज पर खर्च नहीं होगा तो उसे सरकार किस खजाने में जमा कर रही है। - मनु ठाकुर
--

जो भी मरीज अस्पताल में भर्ती होता है, उसे सभी प्रकार की दवाइयां सरकारी मिलनी चाहिए। - रिशु ठाकुर
--

दवाइयों का स्टॉक यदि खत्म हो चुका है तो उसे समय रहते उपलब्ध करवाना चाहिए था। - आकाश

--
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed