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Chamba News: तीन माह उधार सामान लिया, भुगतान की बारी आई तो थमा दिया खाली खाते का चेक
Fri, 25 Sep 2026 10:40 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 25 Sep 2026 10:40 PM IST
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3.35 लाख का चेक बाउंस होने पर रजनेश को नौ माह का साधारण कारावास, 4.50 लाख जुर्माना-मुआवजा
राशि जमा न करवाने पर भुगतना होगा दो माह का अतिरिक्त कारावास
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। तीन माह तक उधार पर सामान लेने के बाद बकाया चुकाने के लिए दिया गया 3.35 लाख रुपये का चेक खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
मामला अदालत पहुंचा तो चंबा के रजनेश कुमार को सजा भुगतनी पड़ी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निखिल अग्रवाल की अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत उसे दोषी करार देते हुए नौ माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 4.50 लाख रुपये जुर्माना-मुआवजा भी लगाया है। यह राशि शिकायतकर्ता को दी जाएगी। राशि जमा नहीं करने पर दोषी को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामला बालू बाजार चंबा स्थित हरि सरन एंड संस के मालिक अनुप महाजन की ओर से दायर शिकायत से संबंधित है। शिकायत के अनुसार आरोपी ने जून, जुलाई और अगस्त 2020 में कुल 3,36,777 रुपये का सामान उधार लिया था। बकाया राशि के भुगतान के लिए छह सितंबर 2021 को 3.35 लाख रुपये का चेक दिया गया।
शिकायतकर्ता ने चेक बैंक में जमा करवाया, लेकिन नौ सितंबर 2021 को बैंक ने इसे अपर्याप्त धनराशि की टिप्पणी के साथ अनादरित कर दिया। इसके बाद 24 सितंबर 2021 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर चेक की राशि का भुगतान करने के लिए कहा गया। नोटिस मिलने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दायर की।
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सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से चेक, बैंक का रिटर्न मेमो, कानूनी नोटिस, डाक रसीद, पावती, डिलीवरी प्रमाण और खाता विवरण समेत विभिन्न दस्तावेज पेश किए गए। शिकायतकर्ता ने बयान में आरोपी की ओर से उधार पर सामान लेने और बकाया भुगतान के लिए चेक जारी करने की बात कही।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर आरोपी को धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी के पहली बार अपराध करने, परिवार में आश्रित सदस्यों और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए नरमी की मांग की। शिकायतकर्ता की ओर से कड़ी सजा देने का आग्रह किया गया।
अदालत ने चेक अनादरण के मामलों में लगातार वृद्धि का हवाला देते हुए दोषी को परिवीक्षा का लाभ देने से इन्कार कर दिया। हालांकि, राहतकारी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नौ माह के साधारण कारावास और 4.50 लाख रुपये जुर्माना-मुआवजे की सजा सुनाई।
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राशि जमा न करवाने पर भुगतना होगा दो माह का अतिरिक्त कारावास
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। तीन माह तक उधार पर सामान लेने के बाद बकाया चुकाने के लिए दिया गया 3.35 लाख रुपये का चेक खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
मामला अदालत पहुंचा तो चंबा के रजनेश कुमार को सजा भुगतनी पड़ी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निखिल अग्रवाल की अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत उसे दोषी करार देते हुए नौ माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 4.50 लाख रुपये जुर्माना-मुआवजा भी लगाया है। यह राशि शिकायतकर्ता को दी जाएगी। राशि जमा नहीं करने पर दोषी को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामला बालू बाजार चंबा स्थित हरि सरन एंड संस के मालिक अनुप महाजन की ओर से दायर शिकायत से संबंधित है। शिकायत के अनुसार आरोपी ने जून, जुलाई और अगस्त 2020 में कुल 3,36,777 रुपये का सामान उधार लिया था। बकाया राशि के भुगतान के लिए छह सितंबर 2021 को 3.35 लाख रुपये का चेक दिया गया।
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शिकायतकर्ता ने चेक बैंक में जमा करवाया, लेकिन नौ सितंबर 2021 को बैंक ने इसे अपर्याप्त धनराशि की टिप्पणी के साथ अनादरित कर दिया। इसके बाद 24 सितंबर 2021 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर चेक की राशि का भुगतान करने के लिए कहा गया। नोटिस मिलने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दायर की।
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सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से चेक, बैंक का रिटर्न मेमो, कानूनी नोटिस, डाक रसीद, पावती, डिलीवरी प्रमाण और खाता विवरण समेत विभिन्न दस्तावेज पेश किए गए। शिकायतकर्ता ने बयान में आरोपी की ओर से उधार पर सामान लेने और बकाया भुगतान के लिए चेक जारी करने की बात कही।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर आरोपी को धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी के पहली बार अपराध करने, परिवार में आश्रित सदस्यों और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए नरमी की मांग की। शिकायतकर्ता की ओर से कड़ी सजा देने का आग्रह किया गया।
अदालत ने चेक अनादरण के मामलों में लगातार वृद्धि का हवाला देते हुए दोषी को परिवीक्षा का लाभ देने से इन्कार कर दिया। हालांकि, राहतकारी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नौ माह के साधारण कारावास और 4.50 लाख रुपये जुर्माना-मुआवजे की सजा सुनाई।