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बागवानों को अब जिले में मिलेगी सेब की पौध
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प्रमाण पत्र हासिल करता बागवान धारो राम।
- फोटो : Chamba
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चंबा। कुल्लू-शिमला से सेब की पौध लाने के चक्कर से अब बागवानों को छुटकारा मिलेगा। जिले के उत्कृष्ट बागवान धारो राम ने अपनी नर्सरी में सेब की छह प्रजातियों के तीन हजार की पौध तैयार की है। इस पौध की विशेषता यह रहेगी कि ये मिड हिल एरिया में (1500 से 6500 मीटर की ऊंचाई) लगाए जा सकते हैं। साथ ही इनके लिए अधिक चिलिंग आवर्स की जरूरत नहीं रहेगी। इसके लि 700 से 1000 चिलिंग आवर्स पूरे होने चाहिए। बागवानों को खुद की नर्सरी में तैयार की गई सेब की विभिन्न प्रजातियों की प्रति पौध 150 रुपये में मिलेगी।
गौरतलब है कि जिले के बागवानों को उम्दा किस्म की प्रजातियों की पौध खरीदने के लिए बाहरी जिलों का रुख करना पड़ता है। साथ ही कई बार बागवानों को फ्राड होने का भी भय रहता है। लेकिन, अब बागवान की मेहनत का लाभ सभी बागवान हासिल कर सकेंगे। नर्सरी में रेड ब्लॉक्स, सुपर चीफ (फ्रांस), किंग रोट, गाला की प्रजातियों में डार्क ब्राउन गाला, नामा गाला 16316, गाला सिनिगा और शिनिको की पौध को तैयार किया है।
बागवान धारो राम ने बताया कि बागवानों को बाहरी जिलों में जाकर सेब की विभिन्न किस्मों की पौध खरीदने की एवज में कई बार घाटा उठाना पड़ता है। बागवानों को नुकसान से बचाने के लिए उन्होंने अपने पॉलीहाउस में सेब की विभिन्न प्रजातियों की पौध उगाने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने सर्वप्रथम सेब का बीज तैयार किया। उसके बाद ग्राफ्ट कर इन्हें तैयार किया गया। कहा कि बागवानों को सेब की पौध बेचने के साथ-साथ वह उन्हें सेब के पेड़ तैयार होने तक उनकी कटिंग, प्रूनिंग और समय-समय पर कौन-कौन सी खाद डालनी है, इसके बारे में जानकारी देते हैं।
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उद्यान विभाग के उपनिदेशक राजीव चंद्रा ने बताया कि उत्कृष्ट बागवान धारो राम ने मेहनत के बल पर उत्कृष्ट बागवान का खिताब भी हासिल किया है। सेब की विभिन्न प्रजातियों को उगाकर वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। अन्य बागवानों को भी उनसे सीख लेते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रयास करने चाहिए, जिसके लिए विभाग भी हरसंभव सहायता के लिए तत्पर है।
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गौरतलब है कि जिले के बागवानों को उम्दा किस्म की प्रजातियों की पौध खरीदने के लिए बाहरी जिलों का रुख करना पड़ता है। साथ ही कई बार बागवानों को फ्राड होने का भी भय रहता है। लेकिन, अब बागवान की मेहनत का लाभ सभी बागवान हासिल कर सकेंगे। नर्सरी में रेड ब्लॉक्स, सुपर चीफ (फ्रांस), किंग रोट, गाला की प्रजातियों में डार्क ब्राउन गाला, नामा गाला 16316, गाला सिनिगा और शिनिको की पौध को तैयार किया है।
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बागवान धारो राम ने बताया कि बागवानों को बाहरी जिलों में जाकर सेब की विभिन्न किस्मों की पौध खरीदने की एवज में कई बार घाटा उठाना पड़ता है। बागवानों को नुकसान से बचाने के लिए उन्होंने अपने पॉलीहाउस में सेब की विभिन्न प्रजातियों की पौध उगाने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने सर्वप्रथम सेब का बीज तैयार किया। उसके बाद ग्राफ्ट कर इन्हें तैयार किया गया। कहा कि बागवानों को सेब की पौध बेचने के साथ-साथ वह उन्हें सेब के पेड़ तैयार होने तक उनकी कटिंग, प्रूनिंग और समय-समय पर कौन-कौन सी खाद डालनी है, इसके बारे में जानकारी देते हैं।
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उद्यान विभाग के उपनिदेशक राजीव चंद्रा ने बताया कि उत्कृष्ट बागवान धारो राम ने मेहनत के बल पर उत्कृष्ट बागवान का खिताब भी हासिल किया है। सेब की विभिन्न प्रजातियों को उगाकर वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। अन्य बागवानों को भी उनसे सीख लेते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रयास करने चाहिए, जिसके लिए विभाग भी हरसंभव सहायता के लिए तत्पर है।