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Chamba News: टांडा में छह दिन बाद जिंदगी की जंग हार गईं स्नेहा
Wed, 30 Oct 2024 10:00 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 30 Oct 2024 10:00 PM IST
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चंबा। पत्थर लगने से घायल प्राकृतिक जलस्रोत (पनिहार) से पानी लेने गई स्नेहा छह दिन बाद जिंदगी (16) की जंग हार गई हैं। किशोरी ने टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा में आखिरी सांस ली। मंगलवार देरात को उपचार के दौरान स्नेहा की मौत हो गई।
स्नेहा पुत्री अशोक कुमार चंबा विधानसभा क्षेत्र की बरौर पंचायत के गांव छमैरी की रहने वाली थीं। वह पनिहार से पानी भरने गई थीं। इस बीच, पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आ गईं। सिर में पत्थर लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। मेडिकल कॉलेज चंबा में प्राथमिक उपचार देने के बाद स्नेहा को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। पुलिस ने बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। उधर, किशोरी की मौत की खबर से इलाके में माहौल गमगीन है। 24 अक्तूबर को शाम के समय स्नेहा गांव के पास ही पनिहार से पानी लाने गई थीं। बर्तन भरने के लिए बैठीं तो अचानक पहाड़ी से पत्थर स्नेहा पर गिर गया। इससे बेसुध होकर जमीन पर गिर गईं। अन्य किशोरियों के चिल्लाने पर परिवारजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। घायल अवस्था में स्नेहा को मेडिकल कॉलेज चंबा लाया गया। यहां प्राथमिक उपचार देने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज टांडा रेफर कर दिया। छह दिन तक वह जिंदगी और मौत जंग लड़ती रहीं।
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स्नेहा पुत्री अशोक कुमार चंबा विधानसभा क्षेत्र की बरौर पंचायत के गांव छमैरी की रहने वाली थीं। वह पनिहार से पानी भरने गई थीं। इस बीच, पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आ गईं। सिर में पत्थर लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। मेडिकल कॉलेज चंबा में प्राथमिक उपचार देने के बाद स्नेहा को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। पुलिस ने बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। उधर, किशोरी की मौत की खबर से इलाके में माहौल गमगीन है। 24 अक्तूबर को शाम के समय स्नेहा गांव के पास ही पनिहार से पानी लाने गई थीं। बर्तन भरने के लिए बैठीं तो अचानक पहाड़ी से पत्थर स्नेहा पर गिर गया। इससे बेसुध होकर जमीन पर गिर गईं। अन्य किशोरियों के चिल्लाने पर परिवारजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। घायल अवस्था में स्नेहा को मेडिकल कॉलेज चंबा लाया गया। यहां प्राथमिक उपचार देने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज टांडा रेफर कर दिया। छह दिन तक वह जिंदगी और मौत जंग लड़ती रहीं।
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