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Chamba News: नाखूनों की नन्ही दुनिया में चंबा की बड़ी पहचान
Mon, 28 Sep 2026 10:47 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 28 Sep 2026 10:47 PM IST
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चंबा नेल आर्ट बनाती मोमिना शेख।संवादमहिला उत्थान वाली खबर के साथ
मोमिना के हाथों की बारीकी ने सात साल में बनाया मुकाम
दिल्ली से असम-गुजरात तक पहुंच रहे नेल आर्ट के डिजाइन
500 से अधिक ऑर्डर पूरे किए, 30 से 40 युवतियों को सिखा चुकीं कला
मोहम्मद अयूब
चंबा। चंबा के एक मोहल्ले से निकली बारीक कलाकारी अब देश के कई राज्यों में अपनी छाप छोड़ रही है।
जुलाहकड़ी की मोमिना शेख ने सात साल पहले नेल आर्ट का हुनर अपनाया था। तब यह उनके लिए महज रुचि थी, लेकिन धीरे-धीरे इसी कला ने उन्हें पहचान के साथ रोजगार भी दिया। आज उनके हाथों से तैयार नेल आर्ट के डिजाइन दिल्ली, असम, गुजरात और पंजाब तक पहुंच रहे हैं।
मोमिना के पिता आमीन और माता शमशाद ने बताया कि बेटी को बचपन से ही इस कला में रुचि थी। परिवार ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। पति अल्ताफ ने भी शादी के बाद उसके काम में सहयोग दिया। मोमिना ने फ्रेंच नेल आर्ट सहित विभिन्न आकर्षक डिजाइनों में अपनी पहचान बनाई है। हैदराबाद और असम तक उनके बनाए नेल आर्ट के पार्सल भेजे जा चुके हैं।
मोमिना के लिए हर डिजाइन सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि घंटों की मेहनत का परिणाम है। एक डिजाइन तैयार करने में तीन से चार घंटे तक लगते हैं। अब तक करीब 500 ऑर्डर पूरे कर चुकीं मोमिना को डिजाइन और बारीकी के आधार पर 500 से 2000 रुपये तक मिलते हैं।
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अपने हुनर को रोजगार तक सीमित रखने के बजाय उन्होंने इसे दूसरों तक भी पहुंचाया। अब तक 30 से 40 युवतियों को नेल आर्ट का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनका कहना है कि इस कला में रचनात्मकता, धैर्य और बारीकी जरूरी है। मेहनत और लगन से नेल आर्ट को स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बनाया जा सकता है। चंबा से शुरू हुई उनकी कला अब कई राज्यों में पहचान बना रही है।
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दिल्ली से असम-गुजरात तक पहुंच रहे नेल आर्ट के डिजाइन
500 से अधिक ऑर्डर पूरे किए, 30 से 40 युवतियों को सिखा चुकीं कला
मोहम्मद अयूब
चंबा। चंबा के एक मोहल्ले से निकली बारीक कलाकारी अब देश के कई राज्यों में अपनी छाप छोड़ रही है।
जुलाहकड़ी की मोमिना शेख ने सात साल पहले नेल आर्ट का हुनर अपनाया था। तब यह उनके लिए महज रुचि थी, लेकिन धीरे-धीरे इसी कला ने उन्हें पहचान के साथ रोजगार भी दिया। आज उनके हाथों से तैयार नेल आर्ट के डिजाइन दिल्ली, असम, गुजरात और पंजाब तक पहुंच रहे हैं।
मोमिना के पिता आमीन और माता शमशाद ने बताया कि बेटी को बचपन से ही इस कला में रुचि थी। परिवार ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। पति अल्ताफ ने भी शादी के बाद उसके काम में सहयोग दिया। मोमिना ने फ्रेंच नेल आर्ट सहित विभिन्न आकर्षक डिजाइनों में अपनी पहचान बनाई है। हैदराबाद और असम तक उनके बनाए नेल आर्ट के पार्सल भेजे जा चुके हैं।
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मोमिना के लिए हर डिजाइन सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि घंटों की मेहनत का परिणाम है। एक डिजाइन तैयार करने में तीन से चार घंटे तक लगते हैं। अब तक करीब 500 ऑर्डर पूरे कर चुकीं मोमिना को डिजाइन और बारीकी के आधार पर 500 से 2000 रुपये तक मिलते हैं।
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अपने हुनर को रोजगार तक सीमित रखने के बजाय उन्होंने इसे दूसरों तक भी पहुंचाया। अब तक 30 से 40 युवतियों को नेल आर्ट का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनका कहना है कि इस कला में रचनात्मकता, धैर्य और बारीकी जरूरी है। मेहनत और लगन से नेल आर्ट को स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बनाया जा सकता है। चंबा से शुरू हुई उनकी कला अब कई राज्यों में पहचान बना रही है।