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साइंस संकाय के अध्यापक न होने पर 40 विद्यार्थिँयों ने किया पलायन
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सुरंगानी (चंबा)। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को पसंदीदा विषयों की पढ़ाई के लिए दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। जिले का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मंजीर इसका एक उदाहरण है, जहां पर पिछले कई महीनों से विज्ञान संकाय की पढ़ाई करवाने के लिए शिक्षक ही नहीं है।
इस वजह से स्कूल के 40 विद्यार्थी स्कूल छोड़ चुके हैं। हालांकि अभिभावकों ने जिला प्रशासन से लेकर सरकार तक शिक्षकों की तैनाती के लिए कई बार मांग उठाई। मगर हर बार आश्वासन ही मिले। ऐसे में बच्चों को दूसरे स्कूलों में ही दाखिला दिलवाना उचित समझा। आज स्कूल की साइंस संकाय की जमा एक और जमा दो कक्षा में एक भी छात्र नहीं है।
जानकारी के अनुसार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मंजीर में कुछ समय पूर्व एक बायोलॉजी के शिक्षक की नियुक्ति हुई थी। मगर बाद में फरवरी माह में उसका तबादला कर दूसरे स्कूल में भेज दिया गया। वर्तमान समय में मंजीर में साइंस विषय के बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स और मैथ जैसे महत्वपूर्ण विषय के टीचर तक नहीं हैं। साइंस संकाय के अध्यापकों के अभाव में शिक्षा हासिल कर रहे 40 विद्यार्थियों ने भी यहां से पलायन दूसरे स्कूलों में कर लिया है।
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अब बच्चों को विज्ञान संकाय की पढ़ाई करने के लिए मंजीर से 35 से 40 किलोमीटर का सफर तय कर चंबा जाना पड़ रहा है। हैरानी की बात ये है कि शिक्षा विभाग बच्चों की बेहतर शिक्षा प्रदान करने और बेहतर रिजल्ट की बात करता है। लेकिन, विद्यालयों में अध्यापकों के ही पद रिक्त होने की सूरत में किस प्रकार से बेहतरीन रिजल्ट आ सकता है?
एसएमसी अध्यक्ष सुरजीत कुमार, अभिभावक तुफैल मोहम्मद, मुकेश कुमार, सुरजीत कुमार, रजिंद्र कुमार, यासीन मोहम्मद, खेमराज, कमलेश कुमार, रजनीश, कमल कुमार, पवन कुमार और अजय कुमार ने बताया कि रावमापा मंजीर में विज्ञान संकाय के अध्यापक न होने से यहां से सभी बच्चों ने पलायन कर दूसरे स्कूलों में दाखिल लिया है।
कई बार प्रस्ताव पारित कर शिक्षा विभाग को भेजे गए हैं। लेकिन, अध्यापकों के पदों को भरा नहीं जा सका है। अभिभावकों ने सरकार और शिक्षा विभाग से नए शैक्षणिक सत्र से पूर्व साइंस संकाय के अध्यापकों के रिक्त पदों को भरने की मांग उठाई है।
इनसेट
शिक्षा उपनिदेशक देवेंद्र पाल ने बताया कि रावमापा मंजीर में रिक्त विज्ञान संकाय के अध्यापकों के खाली पदों के बारे उन्हें जानकारी है। उन्होंने कहा कि एसएमसी से आए प्रस्ताव को शिक्षा निदेशक को भेज दिया गया है। अध्यापकों के पदों को भरने संबंधी व्यवस्था निदेशालय से ही होगी।
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इस वजह से स्कूल के 40 विद्यार्थी स्कूल छोड़ चुके हैं। हालांकि अभिभावकों ने जिला प्रशासन से लेकर सरकार तक शिक्षकों की तैनाती के लिए कई बार मांग उठाई। मगर हर बार आश्वासन ही मिले। ऐसे में बच्चों को दूसरे स्कूलों में ही दाखिला दिलवाना उचित समझा। आज स्कूल की साइंस संकाय की जमा एक और जमा दो कक्षा में एक भी छात्र नहीं है।
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जानकारी के अनुसार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मंजीर में कुछ समय पूर्व एक बायोलॉजी के शिक्षक की नियुक्ति हुई थी। मगर बाद में फरवरी माह में उसका तबादला कर दूसरे स्कूल में भेज दिया गया। वर्तमान समय में मंजीर में साइंस विषय के बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स और मैथ जैसे महत्वपूर्ण विषय के टीचर तक नहीं हैं। साइंस संकाय के अध्यापकों के अभाव में शिक्षा हासिल कर रहे 40 विद्यार्थियों ने भी यहां से पलायन दूसरे स्कूलों में कर लिया है।
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अब बच्चों को विज्ञान संकाय की पढ़ाई करने के लिए मंजीर से 35 से 40 किलोमीटर का सफर तय कर चंबा जाना पड़ रहा है। हैरानी की बात ये है कि शिक्षा विभाग बच्चों की बेहतर शिक्षा प्रदान करने और बेहतर रिजल्ट की बात करता है। लेकिन, विद्यालयों में अध्यापकों के ही पद रिक्त होने की सूरत में किस प्रकार से बेहतरीन रिजल्ट आ सकता है?
एसएमसी अध्यक्ष सुरजीत कुमार, अभिभावक तुफैल मोहम्मद, मुकेश कुमार, सुरजीत कुमार, रजिंद्र कुमार, यासीन मोहम्मद, खेमराज, कमलेश कुमार, रजनीश, कमल कुमार, पवन कुमार और अजय कुमार ने बताया कि रावमापा मंजीर में विज्ञान संकाय के अध्यापक न होने से यहां से सभी बच्चों ने पलायन कर दूसरे स्कूलों में दाखिल लिया है।
कई बार प्रस्ताव पारित कर शिक्षा विभाग को भेजे गए हैं। लेकिन, अध्यापकों के पदों को भरा नहीं जा सका है। अभिभावकों ने सरकार और शिक्षा विभाग से नए शैक्षणिक सत्र से पूर्व साइंस संकाय के अध्यापकों के रिक्त पदों को भरने की मांग उठाई है।
इनसेट
शिक्षा उपनिदेशक देवेंद्र पाल ने बताया कि रावमापा मंजीर में रिक्त विज्ञान संकाय के अध्यापकों के खाली पदों के बारे उन्हें जानकारी है। उन्होंने कहा कि एसएमसी से आए प्रस्ताव को शिक्षा निदेशक को भेज दिया गया है। अध्यापकों के पदों को भरने संबंधी व्यवस्था निदेशालय से ही होगी।