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Chamba News: विशेषज्ञों की कमी से महिलाओं का बढ़ा मर्ज
Sat, 29 Jul 2023 11:21 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 29 Jul 2023 11:21 PM IST
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चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में मरीजों की मर्ज कम होने का नाम नहीं ले रहा है। खासकर गायनी विशेषज्ञों की कमी का खामियाजा जिले की सैकड़ों महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है।कुल मिलाकर विशेषज्ञों की कमी मरीजों पर भारी पड़ने लगी है। मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग को प्रबंधन के लिए चलाना दिनप्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि इस विभाग में विशेषज्ञों की संख्या नाम मात्र है। दो विशेषज्ञों के सहारे इस विभाग को लंबे समय से चलाया जा रहा है।
इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं सहित अन्य महिलाओं को ओपीडी और वार्ड की सेवाओं में संपूर्ण सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई बार महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए ओपीडी में कोई भी महिला रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होता है। ऐसी परिस्थिति में प्रबंधन किसी मेडिकल अफसर को ओपीडी में बैठाकर महिलाओं के स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करवाता है जबकि ओपीडी में एक या दो महिला रोग विशेषज्ञ होना काफी आवश्यक हैं। मेडिकल कॉलेज में जिले के सभी उपमंडलों से महिलाएं अपने स्वास्थ्य की जांच करवाने के लिए पहुंचती हैं लेकिन उन्हें ओपीडी में कई बार विशेषज्ञ की सेवाएं नहीं मिल पातीं। विशेषज्ञों की कमी के चलते कई गर्भवतियों को हाई रिस्क प्रसव के दौरान टांडा रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा ऑप्रेशन थियेटर की सेवाएं भी विशेषज्ञों की कमी की वजह से प्रभावित हो रही हैं। तीमारदारों हंसराज, केवल, सुनील कुमार, रवि कुमार, कमलेश और जितेंद्र कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की गायनी ओपीडी में व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं। इसकी वजह से महिलाओं को अपना इलाज करवाने के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। यही कारण है कि निजी अस्पताल विशेषज्ञों की कमी का फायदा उठाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के मीडिया समन्वयक डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि विशेषज्ञों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है।
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इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं सहित अन्य महिलाओं को ओपीडी और वार्ड की सेवाओं में संपूर्ण सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई बार महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए ओपीडी में कोई भी महिला रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होता है। ऐसी परिस्थिति में प्रबंधन किसी मेडिकल अफसर को ओपीडी में बैठाकर महिलाओं के स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करवाता है जबकि ओपीडी में एक या दो महिला रोग विशेषज्ञ होना काफी आवश्यक हैं। मेडिकल कॉलेज में जिले के सभी उपमंडलों से महिलाएं अपने स्वास्थ्य की जांच करवाने के लिए पहुंचती हैं लेकिन उन्हें ओपीडी में कई बार विशेषज्ञ की सेवाएं नहीं मिल पातीं। विशेषज्ञों की कमी के चलते कई गर्भवतियों को हाई रिस्क प्रसव के दौरान टांडा रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा ऑप्रेशन थियेटर की सेवाएं भी विशेषज्ञों की कमी की वजह से प्रभावित हो रही हैं। तीमारदारों हंसराज, केवल, सुनील कुमार, रवि कुमार, कमलेश और जितेंद्र कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की गायनी ओपीडी में व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं। इसकी वजह से महिलाओं को अपना इलाज करवाने के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। यही कारण है कि निजी अस्पताल विशेषज्ञों की कमी का फायदा उठाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के मीडिया समन्वयक डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि विशेषज्ञों की कमी के बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है।
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