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Chamba News: आरोप सिद्ध न होने पर चालक बरी
Thu, 27 Jul 2023 11:23 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 27 Jul 2023 11:23 PM IST
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चंबा। कार दुर्घटना के लिए चालक पर लगाए गए समस्त आरोप साबित न होने पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुभाष चंद्र भसीन की अदालत ने उसे आरोप मुक्त करते हुए बरी कर दिया। 19 नवंबर 2022 को पुलिस ने एक व्यक्ति के धारा 154 सीआरपीसी के तहत बयान कलमबद्ध किए थे। इस दिन भरमौर के पूलन मोड़ में सुबह सात बजे एक गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। टीम को वहां एक कार एचपी 46-1081 दुर्घटनाग्रस्त मिली जो ऊपर वाली सड़क से गिरकर नीचे दूसरी सड़क पर पड़ी थी।
गाड़ी में चालक सहित उसका पिता और भाई भी घायल अवस्था में पाए गए थे। इन सभी को गाड़ी से बाहर निकालकर उपचार के लिए भरमौर अस्पताल पहुंचाया गया। यहां पर चिकित्सक ने चालक के पिता को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने चालक के खिलाफ 279, 337, 338 और 304 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले की छानबीन आरंभ की गई। पुलिस ने गाड़ी के सभी कागजात और चालक का ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी की चाबियां आदि कब्जे में ले लिए। इसके बाद उसके खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में चालान पेश किया गया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में ट्रायल चला। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाह इस स्थिति में नहीं हैं कि आरोपी को सजा दी जा सके। दूसरी तरफ आरोपी ने यह दलील दी कि उसके पास जायज ड्राइविंग लाइसेंस है। उसने दलील दी कि उसने गाड़ी तेज गति से क्यों चलानी थी और दुर्घटना के लिए गलती क्यों करनी थी। क्या उसे अपनी, पिता और भाई की जान की भी परवाह नहीं थी। अदालत ने चालक की दलील को उसे सजा से बाहर रखने के लिए उपयुक्त समझते हुए उसे दोष मुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।
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गाड़ी में चालक सहित उसका पिता और भाई भी घायल अवस्था में पाए गए थे। इन सभी को गाड़ी से बाहर निकालकर उपचार के लिए भरमौर अस्पताल पहुंचाया गया। यहां पर चिकित्सक ने चालक के पिता को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने चालक के खिलाफ 279, 337, 338 और 304 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले की छानबीन आरंभ की गई। पुलिस ने गाड़ी के सभी कागजात और चालक का ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी की चाबियां आदि कब्जे में ले लिए। इसके बाद उसके खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में चालान पेश किया गया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में ट्रायल चला। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाह इस स्थिति में नहीं हैं कि आरोपी को सजा दी जा सके। दूसरी तरफ आरोपी ने यह दलील दी कि उसके पास जायज ड्राइविंग लाइसेंस है। उसने दलील दी कि उसने गाड़ी तेज गति से क्यों चलानी थी और दुर्घटना के लिए गलती क्यों करनी थी। क्या उसे अपनी, पिता और भाई की जान की भी परवाह नहीं थी। अदालत ने चालक की दलील को उसे सजा से बाहर रखने के लिए उपयुक्त समझते हुए उसे दोष मुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।
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