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Chamba News: डॉक्टर ले रहे निमोनिया से बचाव का प्रशिक्षण
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चंबा। जन्म से पांच वर्ष की आयु वाले बच्चों की मौत का मुख्य कारण निमोनिया पाया गया है। बच्चों को पांच साल की उम्र में मौत से बचाने के लिए निमोनिया से बचाए रखने की जरूरत है। इसको लेकर जिले के चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें जिला स्वास्थ्य अधिकारी और शिशु रोग विशेषज्ञ ने स्वास्थ्य कर्मचारियों को निमोनिया के संबंध में जरूरी जानकारी दी। निमोनिया से बच्चों को किस प्रकार बचाया जा सकता है और निमोनिया पीड़ित बच्चों का किस प्रकार से इलाज किया जाना चाहिए इसको लेकर विस्तार से जानकारी दी गई।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर जालम सिंह भारद्वाज ने बताया कि जिले के विभिन्न अस्पतालों से एक-एक चिकित्सा अधिकारी और एक-एक स्टॉफ नर्स को इस प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षित किया गया है। कहा कि जन्म से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों में होने वाली मौत का एक प्रमुख कारण निमोनिया है।
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इसको लक्षणों को समय पर पहचान करके और इसके उपचार का यथाशीघ्र प्रबंध करके इनसे होने वाली मृत्यु को रोका जा सकता है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राज कुमार सूर्या ने उपस्थित डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को निमोनिया से बचाव और उसकी रोकथाम के बारे में जानकारी दी। कहा कि बच्चों में निमोनिया होने के मुख्य लक्षणों जैसे सांस का तेज होना, कुछ भी खाने-पीने में असमर्थ होना, बुखार होना, दौरे पड़ना या बेहोश होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में शिशु रोग विशेषज्ञ के पास बच्चे को ले जाकर उसका तुरंत उपचार करवाएं। कहा कि स्तनपान को जारी रखते समय पर अतिरिक्त आहार शुरू करके एवं संपूर्ण टीकाकरण करवा कर भी बच्चों को निमोनिया से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
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बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें जिला स्वास्थ्य अधिकारी और शिशु रोग विशेषज्ञ ने स्वास्थ्य कर्मचारियों को निमोनिया के संबंध में जरूरी जानकारी दी। निमोनिया से बच्चों को किस प्रकार बचाया जा सकता है और निमोनिया पीड़ित बच्चों का किस प्रकार से इलाज किया जाना चाहिए इसको लेकर विस्तार से जानकारी दी गई।
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जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर जालम सिंह भारद्वाज ने बताया कि जिले के विभिन्न अस्पतालों से एक-एक चिकित्सा अधिकारी और एक-एक स्टॉफ नर्स को इस प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षित किया गया है। कहा कि जन्म से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों में होने वाली मौत का एक प्रमुख कारण निमोनिया है।
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इसको लक्षणों को समय पर पहचान करके और इसके उपचार का यथाशीघ्र प्रबंध करके इनसे होने वाली मृत्यु को रोका जा सकता है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राज कुमार सूर्या ने उपस्थित डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को निमोनिया से बचाव और उसकी रोकथाम के बारे में जानकारी दी। कहा कि बच्चों में निमोनिया होने के मुख्य लक्षणों जैसे सांस का तेज होना, कुछ भी खाने-पीने में असमर्थ होना, बुखार होना, दौरे पड़ना या बेहोश होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में शिशु रोग विशेषज्ञ के पास बच्चे को ले जाकर उसका तुरंत उपचार करवाएं। कहा कि स्तनपान को जारी रखते समय पर अतिरिक्त आहार शुरू करके एवं संपूर्ण टीकाकरण करवा कर भी बच्चों को निमोनिया से काफी हद तक बचाया जा सकता है।